आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है. साल 2023 में महिला दिवस की थीम इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फॉर जेंडर इक्वेलिटी है. इसके जरिए उन महिलाओं और लड़कियों की पहचान करना है जो प्रौद्योगिकी और डिजिटल शिक्षा की उन्नति में योगदान दे रही है. वर्कप्लेस में महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इनमें से एक करियर ब्रेक भी है. कई बार मां बनने तो कभी दूसरे कारणों से महिलाओं को करियर ब्रेक लेना पड़ता है. ऐसी महिलाओं की मदद करने के लिए नेहा बगारिया ने jobsforher.com स्टार्टअप की शुरुआत की. 

2015 में शुरू किया स्टार्ट अप

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नेहा बगारिया ने मार्च 2015 में jobsforher.com वेबसाइट की शुरुआत की थी. मां बनने के बाद उन्होंने खुद साढ़े तीन साल का करियर ब्रेक लिया था. इससे पहले वह बेंगलुरु की एक बायो फार्मा मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में नौकरी करती थी. नेहा ने अमेरिका के पेंसिल्वेनिया के वॉर्टन स्कूल ऑफ द यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है. उनकी फाइनेंस, मार्केटिंग और मैनेजमेंट ऑफ इंफोर्मेशन सिस्टम में ग्रेजुएशन किया है. जॉब्स फॉर हर में नौ हजार से अधिक कंपनियां पर्टनर है और 30 लाख से अधिक महिलाओं को नौकरी ढूंढने में मदद की जाती है. 

ऐसे आया वेबसाइट का आइडिया

जी बिजनेस से बातचीत में नेहा ने बताया कि, 'जब मेरे बच्चे हुए थे तो मैंने भी करियर ब्रेक लिया था. साढ़ तीन साल बाद मैं काम पर वापस आई तो मुझे एहसास हुआ कि कितना दोबारा से शुरुआत करने कितना ज्यादा मुश्किल है. मुझे मेरे परिवार की तरफ से पूरा सपोर्ट मिला. मेरे पति ने बच्चों की परवरिश में पूरी मदद की थी. यही कारण है कि मैं दोबारा काम पर वापस लौट सकी. मैंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में उन महिलाओं से बात की, जिन्होंने करियर ब्रेक लिया था. जब मुझे एहसास हुआ कि करियर ब्रेक के बाद दोबारा काम शुरू करने में दिक्कते हैं तो मैंने jobs for her बनाई. ' 

करियर ब्रेक में सिखती हैं ये स्किल्स 

नेहा बताती हैं कि, 'पिछले आठ साल में हमने कंपनीज को समझाया कि औरतें जो करियर ब्रेक लेती हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि करियर ब्रेक का मतलब ये नहीं है कि महिलाएं काम नहीं कर रही हैं. वह अलग काम कर रही हैं. इन काम से उनके लाइफ स्किल्स में काफी सुधार आया है. इन स्किल्स से उनकी नौकरियों में भी टीम वर्क, मैनेजमेंट, धैर्य, मोल-भाव आदि जैसी चीजों में बहुत ज्यादा मदद मिलेगी. इसके अलावा ये महिलाएं बिना किसी नोटिस पीरियड के आपको ज्वाइन कर सकती है. इसके अलावा यदि आपके पास पार्ट टाइम या वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाएं हैं तो ये महिलाएं खुशी-खुशी वह नौकरी करेंगी.'

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पिता को भी मिले तीन महीने की छुट्टी 

 

नेहा आगे कहती हैं, 'स्टडीज दिखाती है कि जब बच्चे होते हैं तो मर्दों का करियर बढ़ता है. वहीं, महिलाओं का करियर बहुत तेजी से प्रभावित होता है. उन्हें लगता है कि ये जिम्मेदारी ज्यादा जरूरी है. हमें देखना होगा कि कैसे मैटरनिटी लीव के कारण महिलाओं का 40 साल का करियर प्रभावित न हो. अभी नौकरी देने वालों को डर लगता है कि महिलाएं मां बनेगी तो मैटरनिटी लीव पर जाएगी. ऐसे में हमें देखना चाहिए कि पैरेंट लीव जैसी कोई पॉलिसी हो. इसमें तीन महीने मां और तीन महीने पिता को छुट्टी मिलनी चाहिए ताकि दोनों मिलकर बच्चे की परवरिश कर सकें.'