बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय को लेकर सरगर्मी बढ़ी है. ये तीनों बैंक विलय की रणनीति पर अगले सप्ताह बैठक करेंगे. ये बैठक खासकर बैंकों के संगठन के अलग-अलग परतों को लेकर विचार-विमर्श करेंगे. एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि तीनों बैंकों को मिलाकर 85,675 कर्मचारी, 9,489 ब्रांच होंगे और यह सब मिलकर 14.8 खरब रुपये का कारोबार करेंगे. 

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इन मुद्दों पर होगी बैठक

तीनों बैंकों के काम-काज की संरचनाएं अभी अलग-अलग हैं. देना बैंक का दो स्तरीय संरचना है. विजया बैंक का तीन स्तरीय संरचना है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा का चार स्तरीय संरचना है. बैंक अधिकारी ने कहा कि देना बैंक और विजया बैंक की संरचना में जोनल ऑफिस और हेड ऑफिस हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा की संरचना में रीजनल ऑफिस, जोनल ऑफिस और हेड ऑफिस  है. अधिकारी ने कहा कि हम संरचना के फायदे और नुकसान को लेकर समीक्षा कर रहे हैं. 

कौन सी संरचना नए बैंक के लिए बेहतर होगी इस पर विचार किया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि एक केंद्रीय संचालन समिति का गठन किया गया है और इसमें तीन सीईओ और तीनों बैंकों के कार्यकारी निदेशक शामिल हैं. इसके अलावा चौदह कार्यात्मक समूह गठित किए गए हैं, जिसमें जनरल मैनेजर भी शामिल हैं. 

वीआरएस की कोई योजना नहीं

बैंक अधिकारी ने कहा कि तीनों बैंक के विलय के बाद जो बैंक बनेगा, उसके लिए एक ही हेड ऑफिस होगा. विलय के बाद नया बैंक सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को भी बनाए रखने में सक्षम नहीं होगा और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा. लाइवमिंट की खबर के मुताबिक, हालांकि अभी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के लिए कोई विचार नहीं है.

सितंबर में हुआ विलय का फैसला

बीते सितंबर में सरकार ने तीनों बैंकों के विलय को मंजूरी दे दी. इसके पीछे मकसद तीनों बैंकों को मिलाकर मजबूती प्रदान करना है. दो बैंक अपेक्षाकृत मजबूत हैं लेकिन एक कमजोर है. ये तीनों बैंक मिलकर देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक और एचडीएफसी बैंक होंगे. बैंक ऑफ बड़ौदा के सीईओ पी. एस. जयकुमार ने 17 सितंबर को कहा था कि बैंकों के विलय में करीब चार से छह माह का समय लगेगा.