भारतीय संस्‍कृति में जब लोग एक दूसरे से मिलते हैं तो नमस्‍कार या प्रणाम करते हैं. तमाम लोगों को आपने  'राम-राम' कहकर अभिवादन करते हुए भी देखा होगा. कई घरों में तो सुबह उठते ही परिवार के लोग एक दूसरे से  'राम-राम' बोलते हैं. 'राम-राम' को सुनकर हम यही सोचते हैं कि सामने वाला धार्मिक प्रवृत्ति का है, इसलिए भगवान के नाम का मनन करता है, लेकिन सोचने वाली बात ये है कि मनन सिर्फ एक बार राम बोलकर या जय श्रीराम बोलकर भी तो किया जा सकता है. राम के नाम को लगातार दो बार बोलकर ही क्‍यों अभिवादन किया जाता है? आइए आज राम नवमी 2023 (Ram Navami 2023) के मौके पर आपको बताते हैं  'राम-राम' शब्‍द की महिमा.

'राम-राम' का ये है रहस्‍य

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इस मामले में ज्‍योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र बताते हैं कि जाप करने वाली किसी भी माला में 108 मनके होते हैं. ज्‍योतिष में 108 को बेहद शुभ माना गया है. आप एक-एक मनके से गुजरते हुए जब 108 बार मंत्र को बोलते हैं, तब जाकर आपकी एक माला पूरी होती है. लेकिन 'राम-राम' शब्‍द इतना चमत्‍कारी है कि इसे बोलने से ही 108 बार राम के नाम का जाप हो जाता है. यानी 'राम-राम' साथ बोलना एक माला के जाप के समान है.

जानें कैसे मिलता है एक माला के समान जाप का पुण्‍य

अगर आप हिंदी की शब्दावली पर गौर करें तो ‘र’ सत्ताइसवां शब्द है, ‘आ’ दूसरा और ‘म’ पच्चीसवां शब्द है. अब अगर इन तीनों का योग किया जाए तो 27 + 2 + 25 = 54 हुआ और 54 + 54 = 108 हुआ. इस तरह राम-राम शब्‍द को एक साथ कहने से 108 का योग बन जाता है. इसलिए 'राम-राम'  के संबोधन को बहुत शक्तिशाली माना गया है. इसके निरंतर जाप से व्‍यक्ति मोक्ष को भी प्राप्‍त कर सकता है.

108 की संख्‍या क्‍यों है शुभ

माना जाता है कि ज्‍योतिषीय गणना के आधार पर हमारे ऋषि-मुनियों ने माला के लिए 108 का योग तैयार किया था. दरअसल नक्षत्रों की कुल संख्या 27 होती है. हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं. इस तरह अगर हम 27 का गुणा 4 तो योग 108 आएगा. इस आधार पर 108 मनकों की माला का विधान तैयार किया. इस तरह माला का एक एक दाना नक्षत्र के एक एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है.

 

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