उत्‍तराखंड के बद्रीनाथ धाम में Landslide के चलते राष्‍ट्रीय राजमार्ग-7 (NAtional Highway-7) ब्‍लॉक हो गया है. इसके कारण बद्रीनाथ और हेमकुंड जाने वाले वाले तमाम यात्री फंस गए हैं. बता दें बद्रीनाथ धाम चार प्रमुख धामों में से एक है. हर साल यहां भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के लिए देश के तमाम हिस्‍सों से श्रद्धालु आते हैं. माना जाता है कि बाबा बद्रीविशाल के दर्शन करने से जन्‍म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है.

क्‍या होता है भूस्‍खलन और क्‍यों होता है?

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जब भारी मात्रा में चट्टान, मलबा या मिट्टी नीचे खिसक आए तो उसे भूस्‍खलन (Landslide) कहा जाता है. भूस्‍खलन के कई कारण हो सकते हैं जैसे बारिश, भूकंप, बर्फ का पिघलना, ज्वालामुखी का फटना, माइनिंग, जंगलों की कटाई आदि. हालांकि भारत में आमतौर पर भारी वर्षा के कारण लैंडस्लाइड देखे जाते हैं. दरअसल ढलान की ऊपरी सतह फ्रिक्शन के जरिए पर नीचे वाली सतह पर टिकी रहती है. लेकिन जब भारी बारिश होती है तो इसकी ऊपरी सतह पर पानी इकट्ठा होता है, जिससे वो भारी हो जाती है.  ऐसे में बारिश का पानी इन सतहों के बीच के घर्षण को कम कर देता है और ग्रेविटी की ताकत फ्रिक्‍शन पर हावी होकर उसे नीचे खींच लेती है. 

चार धामों में से एक है बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम उत्‍तराखंड के ही नहीं, बल्कि भारत के चार धामों में से एक है.  बद्रीनाथ धाम करीब 3,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. कहा जाता है कि जिस जगह पर बद्रीनाथ धाम है, उस जगह पर कभी भगवान विष्‍णु ने कठोर तप किया था. उस समय माता लक्ष्‍मी ने बदरी यानी बेर का पेड़ बनकर नारायण को छाया प्रदान की थी. तप पूरा होने के बाद भगवान विष्‍णु ने माता लक्ष्‍मी से कहा था कि ये जगह आने वाले समय में बद्रीनाथ के नाम से जानी जाएगी. बद्रीनाथ धाम को सृष्टि का आठवां वैकुंठ भी कहा जाता है. मान्‍यता है कि बद्रीनाथ के दर्शन से व्‍यक्ति मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर हो जाता है. 

 

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