मार्केट रेग्युलेटर SEBI ने ब्रोकर्स की तरफ से किसी तरह की धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला किया है. इसके अलावा म्यूचुअल फंड्स के स्पॉन्सर नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है. आज मार्केट रेग्युलेटर ने बाजार व्यवस्था तथा कंपनी संचालन को और बेहतर बनाने के लिए कई प्रस्तावों को मंजूरी दी है. सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने कहा कि क्लाइंट का ट्रेडिंग वाला पैस ब्रोकर्स के पास रिस्की है. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ट्रेडिंग के लिए क्लाइंट का पैसा ब्रोकर्स के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं हो.

इन्वेस्टर अपना पैसा ब्लॉक कर सकेंगे

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इन्वेस्टर्स के पास यह विकल्प होगा कि वह ब्रोकर्स के पास अपना पैसा ब्लॉक कर सके. अन्य प्रस्ताव के तहत लिस्टेड कंपनियों के निदेशक मंडल में स्थायी रूप से बने होने के चलन को समाप्त करना तथा शेयर ब्रोकरों की धोखाधड़ी पर लगाम लगाने को लेकर नियम शामिल हैं. सेबी के निदेशक मंडल की बुधवार को हुई बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी. 

प्राइवेट इक्विटी फंड्स को स्पॉन्सर बनने की मंजूरी

SEBI ने प्राइवेट इक्विटी फंड्स को म्यूचुअल फंड का प्रायोजक बनने की नियामकीय रूपरेखा को भी मंजूरी दी. इस कदम से म्यूचुअल फंड को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा सेबी ने लिस्टेड कंपनियों के लिये पर्यावरण, सामाजिक और संचालन (ईएसजी) के बारे में खुलासों को लेकर नियामकीय व्यवस्था को मंजूरी दी. 

फंड ब्लॉक की सुविधा मिलेगी

इसके अलावा बाजार नियामक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की तरह शेयर खरीद-बिक्री बाजार के लिये फंड को ‘ब्लॉक’ करने की सुविधा शुरू करेगा. इस पहल का उद्देश्य निवेशकों के पैसे को शेयर ब्रोकरों के दुरुपयोग से सुरक्षित रखना है. 

 

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