हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. कुछ लोग इसके लिए फ्लैट खरीदते हैं तो कुछ लोग प्लॉट लेकर उस पर अपना घर बनाते हैं. अधिकतर लोग घर बनाने के लिए होम लोन (Home Loan) लेते हैं और फिर घर बनाते हैं. नौकरी लगने के बाद शुरुआती दिनों में तो होम लोन की ईएमआई चुकाने में कोई दिक्कत नहीं होती है, लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं. जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे आपकी सैलरी (Salary) कम पड़ने लगती है. होम लोन की ईएमआई (Home Loan EMI) बोझ लगने लगती है. कुछ लोग तो यहां तक सोचने लगते हैं कि घर बेचकर होम लोन से छुटकारा पा लिया जाए. अगर आप भी होम-लोन की ईएमआई से परेशान हो गए हैं तो आइए जानते हैं इसके बोझ को कैसे करें कम.

नौकरी के शुरुआती दौर में अधिक रखें ईएमआई

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जब आप होम लोन लेंगे तो उसकी एक तय ईएमआई बनेगी, जो हर महीने आपको चुकानी होगी. वहीं दूसरी ओर हर गुजरते साल के साथ आपकी सैलरी बढ़ती जाएगी और हो सकता है कि कुछ साल बाद आपकी जिम्मेदारियां भी बढ़ने लगें. ऐसे में नौकरी के बाद के शुरुआती दौर में होम लोन की ईएमआई अधिक रखें, क्योंकि उस वक्त आप अकेले होंगे तो आपके खर्चे बहुत ही कम होंगे. वहीं जब आपकी सैलरी बढ़ने लगेगी तो कुछ साल आप आपकी शादी होगी, बच्चे होंगे और फिर उनकी पढ़ाई का बोझ आप पर आ जाएगा. हालांकि, इतने सालों में आपकी सैलरी भी काफी बढ़ चुकी होगी तो आप आसानी से सारे खर्चे निपटा सकेंगे.

होम लोन को करें री-स्ट्रक्चर

जब आपको लगे कि आपकी सैलरी आपके खर्चों की तुलना में काफी अधिक है तो उस वक्त आपको अपने होम लोन को रीस्ट्रक्चर करवा लेना चाहिए. सैलरी बढ़ी हुई होने के चलते आपको कोशिश करनी चाहिए कि ईएमआई बढ़वा लें, ताकि लोन चुकाने की अवधि कम हो सके. इससे आपको फायदा ये होगा कि आपको कम ब्याज चुकाना होगा. साथ ही आपका होम लोन भी थोड़ा पहले चुकता हो जाएगा. 

एक उदाहरण से समझते हैं

मान लीजिए कि आपने 25 साल की उम्र में 40 लाख रुपये का लोन 30 साल के लिए लिया है. अगर आपने यह लोन 8.5 फीसदी की दर पर लिया है तो आपको हर महीने करीब 30 हजार रुपये की ईएमआई चुकानी होगी. आप अगर इसी तरह पैसे चुकाते रहते हैं तो इन 30 सालों में करीब 70 लाख रुपये का ब्याज चुकाएंगे. वहीं अगर आप शुरुआती दौर में अपने होम लोन की ईएमआई बढ़वा लेते हैं या यूं कहें कि लोन की अवधि को कम कर लेते हैं तो आपके काफी पैसे बचेंगे. जब आपको लगे कि हम लोन की ईएमआई चुकाने में दिक्कत होने लगी है तो उसे रीस्ट्रक्चर करवा कर अपने हिसाब से ईएमआई बनवा लें.

अपने खर्चों का बजट बनाएं

पैसे बचाने का सबसे अच्छा तरीका होता है कि अपने खर्चों को मैनेज किया जाए. अगर आप अपने कुछ जरूरी खर्चे घटाकर अपनी ईएमआई 5-10 फीसदी बढ़ा सकें तो इससे आपके लोन चुकाने की अवधि में काफी कमी आ जाएगी. नतीजा ये होगा कि आपको कम ब्याज चुकाना होगा. हर महीने के लिए खर्चों का एक बजट रखें और उसी के हिसाब से पैसे खर्च करें. कोशिश करें कि उससे अधिक पैसे खर्च ना हों.

सालाना बोनस का करें स्मार्ट यूज

हर कंपनी में सालाना बोनस तो मिलता ही है. कहीं-कहीं इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है, जैसे वैरिएबल पे, इंसेंटिव आदि. ये पैसा पूरे साल का एक साथ जोड़कर मिलता है, जिससे यह अमाउंट काफी ज्यादा हो जाता है. अगर आप एक साथ 1.5-2 लाख रुपये मिलते हैं तो आप उसका इस्तेमाल अपने होम लोन का प्री-पेमेंट करने में करें. इससे आपके होम लोन की बकाया राशि कम हो जाएगी, जिससे आप या तो अपनी ईएमआई कम करवा सकते हैं या फिर लोन चुकाने की अवधि को कम करवा सकते हैं. ये आपका फैसला होगा कि आपको क्या करना है. कोशिश करें कि हर साल अपने होम लोन का कुछ प्री-पेमेंट जरूर करें, जिससे आपको फायदा होगा.

ध्यान रखें ये बात

अगर आप होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो ईएमआई इतनी भी ज्यादा ना बढ़वा लें कि आपको उसे चुकाने में दिक्कत हो. आम तौर पर होम लोन की एमआई आपकी इनहैंड सैलरी के 20-25 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आप अकेले हैं और कोई जिम्मेदारी नहीं है तो शुरुआती दौर में आप 30-35 फीसदी तक के बराबर ईएमआई रख सकते हैं, लेकिन उससे ज्यादा ना रखें. जब जिम्मेदारियां बढ़ें तो अपने होम लोन की रीस्ट्रक्चर करवा लें, जिससे आप अपनी सहूलियत से लोन का भुगतान कर सकें.