नया वित्त वर्ष शुरू होते ही इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) भरने की शुरुआत हो चुकी है. खुद आयकर विभाग ने ट्वीट करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब वित्त वर्ष के पहले दिन से ही करदाताओं को टैक्स (Tax) भरने की सुविधा मिल गई है. यह ट्वीट 4 अप्रैल को किया गया था, जिसमें लिखा था कि असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए अब तक 23 हजार आईटीआर फाइल भी हो चुके हैं. आईटीआर (ITR) भरने की सुविधा तो शुरू हो गई है, लेकिन कई नौकरीपेशा लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें नए टैक्स रिजीम में जाना चाहिए या पुराने. पिछले साल के बजट में नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया गया है. यानी जिसने अपने नियोक्ता को टैक्स रिजीम चुनने की जानकारी नहीं दी होगी, उस पर नए टैक्स रिजीम के हिसाब से टैक्स लग रहा होगा. आइए जानते हैं कि किन लोगों को नए टैक्स रिजीम में शिफ्ट हो जाना चाहिए और क्यों.

पहले जानिए क्या है नया टैक्स रिजीम

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वित्त वर्ष 2023-24 के लिए नए टैक्स रिजीम के तहत 3 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. वहीं 3-6 लाख रुपये तक की इनकम पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा. 6-9 लाख रुपये की इनकम पर आपको 10 फीसदी टैक्स चुकाना होगा. 9-12 लाख रुपये की इनकम पर 15 फीसदी टैक्स लगेगा. 12 से 15 लाख रुपये की इनकम पर आपको 20 फीसदी टैक्स देना होगा. वहीं 15 लाख रुपये से अधिक की इनकम पर आपको 30 फीसदी टैक्स चुकाना होगा.

मिलते हैं ये 3 डिडक्शन

नए टैक्स रिजीम के तहत टैक्स की दर बेहद कम है, लेकिन इसमें डिडक्शन भी गिने-चुने मिलते हैं. नए टैक्स रिजीम में सिर्फ 3 डिडक्शन मिलते हैं. 

1- पहला है स्टैंडर्ड डिडक्शन, जिसके तहत नौकरीपेशा लोगों को 50 हजार रुपये तक पर टैक्स छूट मिलती है. 

2- वहीं दूसरा डिडक्शन है 80CCD(2) के तहत कॉरपोरेट एनपीएस में किया गया निवेश. इसके तहत आप प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 10 फीसदी तक एनपीएस में निवेश करवा सकते हैं और उस पर आपको टैक्स छूट मिलेगी. वहीं अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं तो यह आंकड़ा आपके लिए 14 फीसदी तक हो सकता है.

3- इसके अलवा, तीसरा डिडक्शन है 80CCH क तहत अग्निपथ स्कीम में किया गया गया. इसमें अग्निवीर कॉर्पस फंड में कर्मचारी या सरकार की तरफ से जितना भी पैसा निवेश किया जाता है, वह टैक्स फ्री होता है.

किसे नए टैक्स रिजीम में हो जाना चाहिए शिफ्ट?

अगर आप बहुत सारे निवेश नहीं करते हैं और पुराने टैक्स रिजीम के तहत सेविंग-इन्वेस्टमेंट, इंश्योरेंस, मेडिकल, एनपीएस आदि सुविधाएं नहीं ले रहे हैं तो आपके लिए नया टैक्स सिस्टम बेहतर है. साथ ही अगर आप रेंट नहीं देते हैं और आपका होम लोन नहीं चल रहा है, तो भी आपके लिए नया टैक्स रिजीम ही बेहतर होगा. पुरानी टैक्स व्यवस्था में इन सभी चीजों पर एक तय सीमा तक टैक्स छूट मिलती है, जिसकी वजह से वह आकर्षक लगता है, लेकिन अगर आप उन चीजों पर टैक्स बेनेफिट नहीं लेते हैं तो आपको नए टैक्स रिजीम में आकर फायदा होगा और इनकम टैक्स काफी कम लगेगा.