Aadhaar Authentication: करोड़ों भारतीयों की यूनीक पहचान का प्रमाण आधार कार्ड हमारे वेरेफिकेशन (Aadhaar Card Verification) का बड़ा टूल बन चुका है. लगभग जिस भी वेरिफिकेशन या डॉक्यूमेंटेशन के लिए किसी पहचान पत्र की जरूरत होती है, वहां आधार हमारा सबसे बड़ा प्रमाण होता है. और अब सरकार आधार के ऑथेंटिकेशन के दायरे को और बढ़ाने पर विचार कर रही है. सरकार गुड गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूंइंग, ईज़ ऑफ लिंविंग के लिए इसका दायरा सरकारी संस्थानों के इतर भी बढ़ाने पर फैसला ले सकता है. 

क्या है सरकार का इरादा?

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इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना तकनीक मंत्रालय का प्रस्ताव है कि सरकार के अलावा दूसरे संस्थान भी UIDAI आधारित प्रमाणन कर सकेंगे. उनका कहना है कि अगर इससे नागरिकों को वो सेवा/ सुविधा पाना आसान होता है तो इजाजत दी जा सकती है. इसपर मंत्रालय ने सभी स्टेकहोल्डर्स से उनके विचार और प्रस्ताव मांगे हैं. सभी स्टेकहोल्डर्स को 5 मई तक जवाब देना है. फ़िलहाल सरकारी मंत्रालयों और विभागों को गुड गवर्नेंस (Good Governance) के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति है.

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सेवाओं की बेहतर डिलीवरी के लिए बढ़ाया है प्रस्ताव

MEITY के मुताबिक कोई भी संस्था जो Ease of Doing, Ease of Living और सेवाओं तक बेहतर पहुंच, ज्ञान प्रसार के लिए आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करना चाहती हैं वे प्रस्ताव तैयार करें. इसे केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय या विभाग को और राज्य सरकार के संबंध में राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा. सभी स्टेकहोल्डर्स को 5 मई तक सुझाव देना है, जिसके बाद उनके सुझावों के मुताबिक बदलाव किया जाएगा.

आधार ऑथेंटिकेशन क्या है?

UIDAI के मुताबिकस आधार ऑथेंटिकेशन या "आधार प्रमाणीकरण" एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी व्यक्ति की जनसांख्यिकीय जानकारी (जैसे नाम, जन्म तिथि, लिंग आदि) या बायोमेट्रिक जानकारी (फिंगरप्रिंट या आइरिस) के साथ आधार संख्या UIDAI के केंद्रीय पहचान डेटा रिपॉजिटरी (CIDR) में जमा की जाती है. इसके सत्यापन के लिए और यूआईडीएआई अपने पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर जमा किए गए विवरण की शुद्धता, या इसकी कमी की पुष्टि करता है. ऑथेंटिकेशन का फायदा ये है कि कि जब भी आपको कहीं अपनी आईडी प्रूव करनी होगी, तो आपको अलग से कोई आईडी या मोबाइल नंबर देने की जरूरत नहीं होगी. आपका आधार नंबर ही आपके आईडी वेरिफेकेशन का काम करेगा.

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कब पड़ती है ऑथेंटिकेशन की जरूरत?

विभिन्न सरकारी योजनाओं और निजी सेवा प्रदाताओं जैसे पीडीएस, नरेगा, बैंकों और दूरसंचार ऑपरेटरों ने अपने लाभार्थियों/ग्राहकों के सत्यापन के लिए आधार प्रमाणीकरण को अपनाया है. प्रमाणीकरण आम तौर पर या तो लाभ के वितरण या सेवा की सदस्यता के समय किया जाता है.

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