इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि 2021 में उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी मिलने के बाद से एप्‍पल ने 1,50,000 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार दिया है, जिससे यह देश का सबसे बड़ा ब्लू-कॉलर जॉब क्रिएटर बन गया है.

गवर्नमेंट पीएलआई स्कीम क्या है?

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पीएलआई योजना आमतौर पर प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम है. यह योजना की शुरुआत भारत सरकार ने की है. इस पहल का उद्देश्य न केवल विदेशी कंपनियों को देश में रोजगार देना और इस तरह रोजगार पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

ब्लू-कॉलर जॉब क्या होता है?

अलग-अलग कैटेगरी के जॉब को विभिन्न तरह के कॉलर जॉब में बांटा गया है. ब्लू-कॉलर जॉब में वैसे लोग आते हैं जो जो दिहाड़ी पर काम करते हैं. इनमें वेल्डर, मैकेनिक, इलेक्ट्रीशियन, माइनिंग, किसान, मिस्त्री होते हैं.

3 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से मिला रोजगार

तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से एनडीए के उम्मीदवार और मोदी सरकार में राज्य मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिवर्तनकारी पीएलआई नीतियों के कारण कुल 4 लाख से अधिक नई नौकरियों के साथ लगभग 3 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है.

जून-सितंबर के बीच 10 लाख लोगों को  मिलेगी जॉब

आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आईफोन फैक्ट्रियां जून-सितंबर के बीच 10,000 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर नौकरियां देने के लिए तैयार हैं. वित्त वर्ष 24 में आईफोन का उत्पादन फरवरी के एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जिसमें 70 प्रतिशत निर्यात और कुल बाजार मूल्य 1.6 लाख करोड़ रुपये था.

एप्‍पल का राजस्व वित्त वर्ष 2023 में काफी बढ़ा

केंद्रीय मंत्री ने बताया, आईओएस ऐप डेवलपमेंट अब 1 मिलियन से अधिक नौकरियों का समर्थन करता है. एप्‍पल ने अपने 50 मिलियन डॉलर के आपूर्तिकर्ता कर्मचारी विकास कोष के हिस्से के रूप में महिलाओं के स्वास्थ्य पर एक शिक्षा पहल शुरू की है. भारत में एप्पल का राजस्व वित्त वर्ष 2023 में लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, बिक्री 48 प्रतिशत बढ़कर 49,321 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 76 प्रतिशत बढ़कर 2,229 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले पांच वर्षों में भारत में एप्पल के शुद्ध लाभ की सबसे बड़ी बढ़त है.

भारत में 20 लाख करोड़ के मोबाइल उत्पादन का लक्ष्य

शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग निकाय इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने पिछले महीने कहा था, भारत पिछले 10 वर्षों में 20 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब है, जबकि यह चालू वित्त वर्ष में 1.20 लाख करोड़ रुपये के फोन निर्यात को पार कर गया है, जो एक दशक में निर्यात में 7,500 प्रतिशत की भारी वृद्धि है.