Bankruptcy: दिवालिया घोषित होने की प्रक्रिया अवधि, आवेदन की तिथि से 180 दिनों में पूरी होती है. इसमें दिवालिया और लिक्विडेशन के मामले भी शामिल होते हैं. अगर कोई व्यक्ति दिवालिया घोषित होने का फैसला करता है तो उसे इसके लिए वकील की सहायता लेनी होती है. इसके बाद जरूरी दस्तावेज दिखाकर कोर्ट में प्रस्ताव दायर करना होता है. उसके आधार पर ही न्यायालय को मंजूर या रद्द कर सकता है. व्यक्ति के याचिका दायर करने के बाद सुनवाई के लिए एक तारीख तय की जाती है. इसके बाद अदालत एक अंतरिम प्राप्तकर्ता नियुक्त करती है जो व्यक्ति की सारी संपत्ति पर तुरंत कब्जा कर लेती है.

कब माना जाता है दिवालिया

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किसी भी व्यक्ति को दिवालिया तभी माना जाता है जब वह कानूनी तौर पर दिवालिया घोषित किया जाता है. अगर किसी व्यक्ति पर किसी और का कर्ज चढ़ा है और वह कमजोर आर्थिक स्तिथि के चलते कर्ज चुकाने में असमर्थ है तो वह दिवालिया होने के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकता है. 

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खुद को दिवालिया घोषित करना क्या है 

दिवालियापन एक आर्थिक स्तिथि है. अगर कोई शख्स या कंपनी अपने देनदरियों को कर्ज चुकाने या वापस करने में असमर्थ होती है तो वह खुद को दिवालिया घोषित कर सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति 500 रुपए का उधार भी नहीं चुका सकता तो उसके खिलाफ कोर्ट में दिवालियापन का मामला दर्ज किया जा सकता है. हालांकि ये प्रोसेस थोड़ी पेचीदा होती है.

अगर दिवालिया व्यक्ति पर पहले से कोई आयकर बकाया है तो उसका भुगतान ऋणदाताओं के भुगतान के बाद बची राशि से किया जाएगा. अगर सभी भुगतान होने के बाद पैसा बचता है तो उसे केंद्र और राज्य सरकार में बांट दिया जाता है. 

2016 में हुई दिवालियापन बोर्ड की स्थापना 

देश में दिवालियापन के मामलों से संबंधित भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड की स्थापना 1 अक्टूबर 2016 के दिन की गई थी. यह एक नियामक निकाय है, जिसे दिवाला मामलों को पंजीकृत करने और उनका पर्यवेक्षण करने की ताकत दी गई है.