केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए समर्पित 8 अस्पतालों में ट्रीटमेंट करा रहे 134 मरीजों के लिए 22.20 करोड़ रुपये की राशि जारी की है. ये राशि पिछले साल अगस्त में ऐसे मरीजों को वित्तीय मदद देने के लिए जारी दिशानिर्देश के बाद जारी की गई है. बताते चलें कि 19 मई को मंत्रालय ने सभी श्रेणियों की दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए वित्तीय मदद की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी थी. सरकार ने दुर्लभ बीमारियों पर राष्ट्रीय नीति-2021 (National Policy for Rare Diseases 2021) के तहत ऐसे मरीजों को वित्तीय मदद देने के लिए 11 अगस्त को दिशानिर्देश जारी किया था.

दुर्लभ बीमारियां के इलाज के लिए बढ़ाई गई CoE की संख्या

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अधिकारियों के मुताबिक गोचर रोग, टिरोसिनेमिया, सीवियर कम्बाइंड इम्यूनोडिफिशियेंसी (SCID) सहित अन्य दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए Centres of Excellence (CoE) की संख्या बढ़ाकर 8 से 11 कर दी है.

उन्होंने बताया कि इन एक्सिलेंस सेंटर्स में दिल्ली स्थित एम्स, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (PGIMER), हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के साथ निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, मुंबई स्थित किंग एडवर्ड मेडिकल हॉस्पिटल, कोलकाता स्थित पीजीआईएमईआर, बेंगलुरु स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल के साथ सेंटर फॉर ह्यूमन जेनेटिक, जोधपुर स्थित एम्स और केरल का एसएटी अस्पताल शामिल हैं.

बजट 2022-23 में दुर्लभ बीमारियों के लिए आवंटित किए थे ₹25 करोड़

आधिकारिक सूत्रों ने बताया, ‘‘दिशानिर्देश जारी किए जाने के वित्तीय मदद की चाह रखने वाले मरीजों के आवेदन 8 एक्सिलेंस सेंटर्स से आए और इलाज के लिए अभी तक 22.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.’’

सूत्रों ने बताया कि साल 2022-23 के बजट में दुर्लभ बीमारियों के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और बाकी बची 2.8 करोड़ रुपये की राशि भी दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के उपचार के लिए जारी कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि दिशानिर्देश में उल्लेख है कि इस योजना के तहत प्रति मरीज 50 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद दी जा सकती है और ये राशि संबंधित एक्सिलेंस सेंटर्स को दी जाती है जहां पर उस मरीज का इलाज चल रहा है.

पीटीआई इनपुट्स के साथ