देश का विदेशी मुद्रा भंडार 29 मार्च को समाप्त सप्ताह में 2.95 अरब डॉलर से अधिक बढ़कर 645.58 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गया. भारतीय रिजर्व बैंक ने यह जानकारी दी है. यह लगातार छठा सप्ताह है, जब विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई है. इससे एक सप्ताह पहले देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 14 करोड़ डॉलर बढ़कर 642.63 अरब डॉलर हो गया था. सितंबर, 2021 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 642.45 अरब डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंच गया था. 

रुपए को संभालने के लिए रिजर्व का इस्तेमाल

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लेकिन वैश्विक गतिविधियों के कारण उत्पन्न दबावों के बीच केंद्रीय बैंक ने रुपए की गिरावट को थामने के लिए पूंजी भंडार का उपयोग किया, जिससे मुद्रा भंडार में थोड़ी कमी आई थी. रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 29 मार्च को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां 2.35 अरब डॉलर बढ़कर 570.61 अरब डॉलर हो गईं. 

गोल्ड रिजर्व में 67.3 करोड़ डॉलर का उछाल

डॉलर के संदर्भ में उल्लिखित विदेशी मुद्रा आस्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की घट-बढ़ का प्रभाव शामिल होता है. रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण आरक्षित भंडार का मूल्य 67.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 52.16 अरब डॉलर हो गया. 

मजबूत रिजर्व से RBI को मिलती है मदद

रिजर्व बैंक ने कहा कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 7.3 करोड़ डॉलर घटकर 18.14 अरब डॉलर रह गया. रिजर्व बैंक के मुताबिक, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित जमा भी 20 लाख डॉलर घटकर 4.66 अरब डॉलर रह गयी.  विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि से आरबीआई को रुपए के अस्थिर होने पर उसे स्थिर करने के लिए अधिक गुंजाइश मिलती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि आरबीआई रुपए को भारी गिरावट से बचाने के लिए अधिक डॉलर जारी कर हाजिर और वायदा मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करता है.