Papaya Cultivation: किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कोशिश कर रही हैं. बागवानी के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए बिहार सरकार पपीता की खेती (Papaya Farming) को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. इसके लिए कृषि विभाग उद्यान निदेशालय पपीता की खेती (Papita Ki Kheti) को बढ़ावा देने के लिए दो योजनाएं शुरू की है.

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मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनाओं के तहत पपीते की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. इन दोनों योजनाओं के तहत किसान सस्ते दरों पर लाखों की कमाई करने का मौका दे रही है, जिसमें एक पेड़ में 100 किलो तक उत्पादन हो सकेगा.

नए किसान जून से कर सकेंगे आवेदन

मुख्यमंत्री बागवानी मिशन में 10 हेक्टेयर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन में 2 हेक्टेयर का लक्ष्य पूरा किया गया है. मार्च से आवेदन करने वाले किसानों के बीच पौधा बांटा जाएगा. अब नए किसान योजना का फायदा लेने के लिए जून से आवेदन कर सकेंगे.

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इस भाव पर किसानों को मिलेंगे पपीता के पौधे

किसानों को महज 6.50 रुपये प्रति पौधे मिलेंगे. दूसरे साल 4.50 रुपये वापस मिल जाएंगे. इसके लिए पौधे बचाकर रखने होंगे. बाजार में यह प्रति पौधे 60-70 रुपये मिलेंगे. खेतों की जुताई करने के बाद 2-2 मीटर की लाइन और एक पौधे से दूसरे की दूरी दो मीटर रखनी होगी. इस तरह एक एकड़ में 1,000 पौधे लग जाते हैं. मेड़ बनाकर एक-एक फुट गड्ढा खोदकर उर्वरक देकर पौधे लगाकर सिंचाई कर दी जाती है. इसके लगाने के 6 महीने बाद फल-फूल आने लगते हैं.

इस प्रजाति के मिलेंगे पौधे

पौधे रेड लेडी प्रजाति के दिए जाएंगे. इसकी खासियत है कि सभी पेड़ में फल लगते हैं. फल काफी संख्या में होते हैं. इसमें आम के साथ पपीते का स्वाद होता है. पकने के बाद 10 से 12 दिनों तक खराब नहीं होता है. मुख्यमंत्री बागवानी योजना और राष्ट्रीय बागवानी योजना के तहत एक किसान को 500 से 10,000 तक ही पौधे मिलेंगे. इससे अधिक पौधे नहीं मिल पाएंगे. 10 हेक्टेयर में 9 किसान और 2 हेक्टेयर में चार किसान जुड़े हैं.

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