भारत ब्रॉडबैंड निगम लिमिटेड (बीबीएनएल) की भारतनेट परियोजना के तहत बिछाए जा रहे फाइबर नेटवर्क से जुड़े बुनियादी ढांचे के परिचालन और रखरखाव का काम अपने हाथ में लेने की योजना है. बीबीएनएल ने ग्रामीण इलाकों में तेज इंटरनेट सेवा पहुंचाने के लक्ष्य के साथ शुरू की गयी इस परियोजना के लिए जवाबदेही तय करने और स्थिरता लाने के लक्ष्य के साथ यह कदम उठाया है.

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बीबीएनएल के चेयरमैन सर्वेश सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया, 'वर्तमान में हम सिस्टम डाउन होने पर बीएसएनएल पर निर्भर रहते हैं. भारतनेट के अंतर्गत फाइबर के पूरे रखरखाव का काम बीएसएनएल देखती है. हमने जो फाइबर बिछाया है, उसके रखरखाव का काम भी हम अपने जिम्मे लेने की प्रक्रिया में हैं. हमने सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (यूएसओएफ) से इस चीज की अनुमति देने का आग्रह किया है.' 

बीबीएनएल ने ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने का 70 फीसदी काम बीएसएनएल और 15-15 फीसदी रेलटेल एवं पावरग्रिड को आवंटित किया है. बीबीएनएल ने 1.27 लाख ग्राम पंचायतों को तेज ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने के लिए बीएसएनएल के दो लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर के साथ तीन लाख किलोमीटर का और ऑप्टिकल फाइबर बिछाया.

इस परियोजना को 2011 में शुरू किया गया था और इसका लक्ष्य 2.5 लाख गांवों को तेज ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ना था. इसके लिए दी गयी समयसीमा को कई बार बढ़ाना पड़ा है. अंतिम समयसीमा मार्च, 2019 थी. इस परियोजना के तहत अब तक जहां 1.19 ग्राम पंचायतों में सेवा दी जाने लायक तैयारी पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद अधिकतर नेटवर्क काम नहीं कर रहे हैं. 

इस पूरे तंत्र में कई एजेंसियों के होने और तंत्र विकसित नहीं होने के कारण ग्राम पंचायतों में इस फाइबर नेटवर्क का ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं पा रहा है. सिंह ने कहा, 'हमने नेटवर्क के रखरखाव के लिए 800 लोगों की नियुक्ति की है.'