IPPB: इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (India Post Payments Bank) खुद को एक यूनिवर्स बैंक में बदलना चाहता है क्योंकि पोस्ट ऑफिस ब्रांच का विशाल नेटवर्क फाइनेंशियल इंक्लूजन समावेश हासिल करने में मदद करेगा. ये बातें आईपीपीबी मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) जे वेंकटरामू ने कही. उन्होंने कहा कि IPPB जब 2018 में शुरू हुई थी तब 80% लेनदेन कैश में होता था. हालांकि, लोगों द्वारा टेक्नोलॉजी अपनाने के बाद अब 80% लेनदेन डिजिटल जबकि सिर्फ 20% लेनदेन नकद में होता है.

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भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में वेंकटरामू ने कहा, "अगर हमें एक संपूर्ण बैंकिंग लाइसेंस मिलता है, विशेष रूप से वित्तीय समावेशन के लिए तो हमें बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी.”

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यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस से फाइनेंशियल इंक्लूजन को मिलेगा बढ़ावा

वह बैंक के यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से संपर्क करने से संबंधित एक सवाल का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि क्रेडिट फाइनेंशियल इंक्लूजन के साथ-साथ सामाजिक उत्थान का एक महत्वपूर्ण पहलू है. पोस्ट ऑफिस (Post Office) का विशाल नेटवर्क फाइनेंशियल इंक्लूजन और कर्ज का विस्तार करने में मदद कर सकता है.

IPPB की स्थापना

आईपीपीबी की स्थापना 17 अगस्त, 2016 को कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत हुई थी. इसे एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में डाक विभाग के तहत भारत सरकार की 100% इक्विटी के साथ शामिल किया गया था. इसका स्वामित्व भारत सरकार के पास है.

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(भाषा इनपुट के साथ)