PSU Bank Stock: बीते हफ्ते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया निफ्टी  के टॉप लूजर्स में एक रहा. निफ्टी 50 स्टॉक्स में सबसे ज्यादा इन्फोसिस में गिरावट आई. उसके बाद SBI का शेयर 3 फीसदी टूटा और 576 रुपए पर बंद हुआ. तीन कारोबारी सत्रों से लगातार एसबीआई के शेयरों में गिरावट देखी जा रही है. इस पीएसयू बैंक को लेकर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म UBS ने भी निगेटिव रिपोर्ट जारी की है और रेटिंग को BUY से दो पायदान घटाकर SELL की सलाह दी है.

SBI के लिए टारगेट प्राइस 30 फीसदी घटाया है

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UBS ने अपनी रिपोर्ट में स्टेट बैंक के लिए टारगेट प्राइस को करीब 30 फीसदी घटाया है. ब्रोकरेज का पुराना टारगेट 740 रुपए का था जिसे घटाकर 530 रुपए कर दिया गया है. रेटिंग को BUY से घटाकर SELL कर दिया गया है. कई सालों बाद इस बैंक की रेटिंग को इतना बड़ा डाउनग्रेड किया गया है. 

FY24 में रिटर्न रेशियो पीक पर पहुंच जाएगा

ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि SBI का रिटर्न रेशियो वित्त वर्ष 2023-24 में अपने पीक पर पहुंच जाएगा. इसके बाद FY25 से इसमें गिरावट की शुरुआत होगी. CET1 capital (कॉमन इक्विटी टायर-वन कैपिटल) इस समय 10.8 फीसदी पर है. अब यह पीक पर जा चुका है. बता दें कि यह किसी बैंक के लिए बेस्ट क्वॉलिटी कैपिटल होता है. ब्रोकरेज का कहना है कि इस स्टॉक ने बैंक निफ्टी को आउट परफॉर्म किया है.

EPS में कटौती की गई है

UBS ने अपनी रिपोर्ट में RBI गवर्नर शक्तिकांत दास के उस बयान पर भी ध्यान दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी नजर पर्सनल लोन पर है. गवर्नर दास के बयान के कारण ही ब्रोकरेज ने SBI समेत कई अन्य बैंकों की रेटिंग को डाउनग्रेड किया है. ओवरऑल बैंकिंग सेक्टर पर न्यूट्रल रेटिंग दी है और EPS में 2-5 फीसदी की कटौती का अुमान लगाय है.

पर्सनल लोन का शेयर 11 फीसदी के पार पहुंचा

ब्रोकरेज का मानना है कि अनसिक्यॉर्ड लोन में डिफॉल्ट का रिस्क बढ़ गया है. इसके कारण क्रेडिट लॉस 200 बेसिस प्वाइंट्स तक हो सकता है. SBI के टोटल लोन बुक में अन सिक्यॉर्ड लोन 11 फीसदी के करीब है. जो ग्राहक पहले से कर्ज में हैं उन्हें भर-भर कर लोन दिया जा रहा है. FY19 में पर्सनल लोन का शेयर 12 फीसदी था जो अब बढ़कर 23 फीसदी पर पहुंच गया है.

अन सिक्योर्ड पर्सनल लोन का शेयर तेजी से बढ़ा रहा है

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि पर्सनल लोन की हालत ऐसी हो गई है कि लोग पुराने लोन को चुकाने के लिए नया लोन ले रहे हैं. यही वजह है कि 5 से ज्यादा पर्सनल लोन लेने वालों की संख्या में बड़ा उछाल आया है. 2018 में पांच से अधिक लोन लेने वाले ग्राहकों की संख्या 1 फीसदी थी. अब यह बढ़कर 7.7 फीसदी पर पहुंच गई है. UBS ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा है कि वैल्युएशन अभी भी अट्रैक्टिव है, लेकिन चिंता असेट क्वॉलिटी को लेकर बढ़ गई है.

(डिस्‍क्‍लेमर: यहां स्‍टॉक्‍स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)

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