SEBI Ban Mehul Choksi: मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने मेहुल चोकसी पर बड़ी कार्रवाई की है. सेबी ने भगोड़े व्यापारी मेहुल चोकसी पर कैपिटल मार्केट से 10 साल का बैन लगा दिया है और गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के शेयरों के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में 5 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि मेहुल चोकसी को ये जुर्माना अगले 45 दिनों में भरना है. बता दें कि मेहुल चोकसी गीतांजलि जेम्स का चेयरमैन और मैनेजिंग एडिटर था और साथ ही साथ प्रमोटर ग्रुप में भी शामिल था. मेहुल चोकसी, नीरव मोदी का मामा था और दोनों के ऊपर ही पंजाब नेशनल बैंक के साथ 14000 करोड़ रुपए का धोखाधड़ी करने का आरोप है. 

घोटाला सामने आने के बाद देश से भागे

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2018 की शुरुआत में मेहुल चोकसी और नीरव मोदी की ओर से किए गए घोटाले के बारे में जानकारी मिली तो दोनों ही देश छोड़कर भाग गए. चोकसी एंटीगुआ और बारबुडा में है जबकि नीरव मोदी ब्रिटेन की जेल में बंद है. नीरव मोदी ने भारत के प्रत्यर्पण के अनुरोध को चुनौती दी है. 

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मई 2022 में सेबी ने भेजा था नोटिस

बता दें कि मई 2022 में सेबी ने मेहुल चोकसी को कारण बताओ नोटिस भेजा था. सेबी ने गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के शेयरों के साथ हुई हेरफेर को लेकर मेहुल चोकसी को कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई थी. सेबी ने जुलाई 2011 से जनवरी 2012 की अवधि के लिए कंपनी के शेयरों में कुछ संस्थाओं की व्यापारिक गतिविधियों की जांच की थी.

सेबी ने जांच में पाया से आरोप

सेबी ने अपने आदेश में कहा कि मेहुल चोकसी ने फ्रंट एंटिटीज के रूप में जानी जाने वाली 15 संस्थाओं के एक ग्रुप को फंड दिया था, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चोकसी और एक-दुसरे से जुड़े हुए थे. इन संस्थाओं ने गीतांजलि जेम्स लिमिटेड के शेयरों को खरीद रखा था. मेहुल चोकसी ने इन संस्थाओं को फ्रंट एंटिटीज के तौर पर इस्तेमाल किया था. 

जांच में पाया गया कि कंपनी की ओर से फ्रंट एंटिटीज को 77.44 करोड़ रुपए का फंड ट्रांसफर हुआ था, जिसमें से 13.34 करोड़ रुपए के फंड का इस्तेमाल फ्रंट संस्थाओं की ओर से स्क्रिप में व्यापार करने के लिए किया गया था. 

चोकसी ने ऐसे की शेयरों में हेर-फेर

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने पाया कि गीतांजलि जेम्स में प्रमोटर्स, बैंक/फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, एफपीआई की होल्डिंग्स के अलावा सामान्य निवेशकों की हिस्सेदारी जून 2011 की तिमाही के अंत में 28.96 फीसदी थी, जो कि सितंबर 2011 की तिमाही में घटकर 19.71 फीसदी हो गई. इससे पता चला कि मेहुल चोकसी गीतांजलि के शेयरों को अलग करने के लिए इन फ्रंट एंटिटी का सहारा लेता था, जिससे सामान्य निवेशकों के लिए शेयरों की कमी होती थी.