प्याज (Onion) के थोक दाम 40 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं, जिसके चलते फुटकर में प्याज 60 से 80 रुपये (Onion Price) किलो बिक रहा है. सप्लाई में कमी के कारण प्याज के दाम आसमान पर चढ़े हुए हैं. बेमौसम बारिश (Rain) और बाढ़ (Flood) ने प्याज की फसल (Onion Crop) को काफी नुकसान पहुंचाया है, नतीजतन लोग महंगा प्याज खरीदने को मजबूर हैं. 

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सरकार ने प्याज की कीमतों (Onion Price) को कंट्रोल करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. सरकार ने प्याज के निर्यात (Onion Export) पर लगी रोक को अगले साल फरवरी तक बढ़ा दिया गया है. 20 रुपये/किलो तक दाम आने के बाद ही प्याज एक्सपोर्ट की मंजूरी दी जाएगी. इसके अलावा जनवरी से प्याज की सप्लाई बढ़ने का भी अनुमान है. भारत में हर साल 20 लाख टन से ज्यादा प्याज एक्सपोर्ट होता है.

एक्सपोर्ट बंद होने का असर

भारत से प्याज का एक्सपोर्ट बंद होने से एशियाई देशों में भी प्याज के दाम लगातार उठ रहे हैं. क्योंकि भारत से प्याज की एक बड़ी खेप (करीब 20 लाख टन सालाना) अन्य देशों को स्पलाई होती है.

 

प्याज का उत्पादन

प्याज के दाम बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह बारिश और बाढ़ से फसल तो चौपट हुई है, साथ ही अगली फसल का उत्पादन भी कम होना की संभावना है. 2019-20 के खरीफ सीजन में प्याज का उत्पादन करीब 26 फीसदी कम होने का अनुमान है. उत्पादन गिरकर 52.06 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है.

आयात को बढ़ावा देने से मिलेगी राहत

आलू-प्याज व्यापार संघ, दिल्ली के महासचिव राजेंद्र शर्मा के मुताबिक, प्याज का एक्सपोर्ट तो काफी समय से बंद है, इससे कीमतों पर कोई असर नहीं देखा गया है. दरअसल, प्याज की फसल को अक्टूबर हुई बारिश से बहुत नुकसान हुआ है. इसलिए फिलहाल अभी स्थिति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है. दामों पर कंट्रोल करने के लिए प्याज के आयात को बढ़ावा देना होगा. 

 

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राजेंद्र शर्मा कहते हैं कि स्थाई समाधान के लिए प्याज का भी एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) तय करना चाहिए. एमएसपी तय होने से प्याज की कमी नहीं आएगी.