भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने और देश की सरहदों की सुरक्षा में उन्हें भागीदार बनाने के लिए डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज की घोषणा की है. इसके तहत स्टार्टअप से ऐसी चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए कहा गया है, जिनसे सुरक्षा बल जूझ रहे हैं. 

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डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज की शुरुआत रक्षा मंत्रालय ने अटल इनोवेशन मिशन के साथ मिलकर की है. इसका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकी की मदद से प्रोटोटाइप और वाणिज्यिक उत्पाद तैयार करना है. इसके लिए सरकार 1.5 करोड़ रुपये तक का अनुदान भी दे रही है. आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर है. इस पहल के तहत कोई स्टार्टअप, छोटा एवं मझोला उद्योग और या कोई व्यक्ति खुद आवेदन कर सकता है.

सरकार का कहना है कि स्टार्टअप बेहतरीन काम कर रहे हैं और इस पहल का मकसद डिफेंस के क्षेत्र में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना है. कई बार पैसों की कमी के कारण स्टार्टअप प्रोटोटाइप, टेस्टिंग और बाजार तैयार करने के लिए जरूरी रिसोर्स नहीं जुटा पाते हैं. डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज इस कमी को दूर करेगा. बदले में स्टार्टअप से अपेक्षा की गई है कि वे लेजर हथियार, अनमैन्ड सरफेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लॉजिस्टिक जैसी साल्युशन देंगे.

कई स्टार्टअप पहले ही रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इनमें टोन्बो इमेजिंग प्रमुख है, जो ऐसे इमेजिंग सेंसस विकसित कर रही है, जिनकी मदद से धूल, धुआं और अंधेरे में भी देखा जा सकता है. इसके अलावा आइडिया फोर्ज  ने भारत का पहला मानव रहित एरियल विमान विकसित किया है. इस स्टार्टअप को आईआईटी मुंबई के छात्रों से शुरू किया है.  नई दिल्ली स्थिति स्टार्टअप विजएक्सपर्ट्स भी रक्षा क्षेत्र में काम कर रहा है. कंपनी द्वारा विकसित भूस्थानिक प्लेटफॉर्म जियोरबिज सेना को वास्तविक समय में ऑपरेशन प्लानिंग से जुड़ी जानकारियां प्रदान करता है ताकि उचित समय पर सही फैसले लिए जा सकें. इसके अलावा कई स्टार्टअप हैं जो घुसपैठ को रोकने और आपात स्थिति में मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध कराने वाले उपकरण की सप्लाई सेना को कर रहे हैं.