किसानों की कमाई में बढ़ोतरी और कृषि उपज को जल्द से जल्द बाजारों तक पहुंचाने में किसान रेल (Kisan Rail) ने अहम भूमिका निभाई है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnaw) ने गुरुवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि 31 जनवरी, 2023 तक कुल 2359 किसान रेल चलाई जा चुकी हैं, जिनमें 7.9 लाख टन खराब हो जाने वाली कृषि उपज को ट्रांसपोर्ट किया गया. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उपज को जल्द से जल्द बाजारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 7 अगस्त, 2020 को किसान रेल की शुरुआत की थी.

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बताते चलें कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ राज्य सरकारों के कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन विभागों के अलावा स्थानीय निकायों, एजेंसियों और मंडियों आदि की सलाह से किसान रेल के परिचालन के लिए संभावित सर्किटों की पहचान की जाती है. भारतीय रेल किसानों की मांग के आधार पर रेक प्रदान करती है.

किसान रेल से कृषि उपज के ट्रांसपोर्टेशन पर मिल रही है 45% सब्सिडी

रेल मंत्री लोकसभा में बताया फलों और सब्जियों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) द्वारा 31 मार्च, 2022 तक किसान रेल से माल ढुलाई में 50% सब्सिडी दी जा रही थी. 31 मार्च, 2022 से 31 मार्च, 2023 तक भारतीय रेल किसान रेल से कृषि उपज के ट्रांसपोर्टेशन के लिए 45% की दर से सब्सिडी दे रही है.

वित्त वर्ष 2021-22 में रेल मंत्रालय ने दी ₹121.86 करोड़ की सब्सिडी

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान रेल मंत्रालय ने सब्सिडी के रूप में ₹27.79 करोड़ का वितरण किया था, जिसका भुगतान MoFPI द्वारा किया गया था. वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान रेल मंत्रालय ने सब्सिडी के रूप में ₹121.86 करोड़ का वितरण किया था, जिसमें MoFPI ने केवल ₹50 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. चालू वर्ष के दौरान 31 जनवरी, 2023 तक रेलवे ने सब्सिडी के रूप में ₹4 करोड़ वितरित किए हैं.

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने लिखित जवाब में बताया कि अभी तक किसान रेल योजना के तहत तापमान नियंत्रित भंडारण सुविधाओं (Temperature Controlled Storage Facilities) के निर्माण के लिए किसानों या व्यापारियों से कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है.