SIP vs STP: म्‍यूचुअल फंड्स एसआईपी (Mutual Funds SIP) के बारे में आपने खूब सुना होगा. आज के समय में निवेश के लिहाज से एसआईपी को काफी अच्‍छा विकल्‍प माना जाता है. लेकिन क्‍या आप STP के बारे में जानते हैं? एसटीपी भी म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश का एक तरीका है, लेकिन ज्‍यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है. आइए आपको बताते हैं इनके बीच क्‍या है फर्क-

SIP

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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि SIP यानी सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान में निवेशक एक निश्चित अमाउंट समय-समय पर निवेश करते हैं. निवेशक कितने अंतराल रोजाना, हफ्ते, महीने, तीन महीने आदि पर निवेश करेंगे, इसका वो खुद ही चुनाव करते हैं. ये म्यूचुअल फ़ंड में निवेश का एक व्यवस्थित तरीका है. लंबे समय की SIP में कम्‍पाउंडिंग का जबरदस्‍त फायदा लिया जा सकता है.

STP

STP यानी सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान भी SIP की तरह म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश का एक तरीका है. STP में निवेशक एकमुश्‍त अमाउंट किसी म्यूचुअल फंड स्‍कीम (आमतौर पर डेट फंड) में निवेश करते हैं और उसके बाद एक रेगुलर इंटरवल पर उसे इक्विटी स्‍कीम्‍स में ट्रांसफर करते हैं. साधारण शब्‍दों में समझें तो STP एक ऐसी SIP है, जो एक म्यूचुअल फंड से दूसरे म्यूचुअल फंड में की जाती है. 

कैसे काम करता है STP

अगर आपके पास 1 लाख रुपए हैं और आप सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान के जरिए इक्विटी फंड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको लिक्विड फंड या डेट स्कीम ढूंढनी होगी और पूरे 1 लाख रुपए उस स्कीम में डालना होगा. अब मान लीजिए आप किसी डेट फंड में अपना पैसा डालते हैं. उसी समय पर आप एक निश्चित अवधि भी तय कर लेते हैं, जिसमें आपका अमाउंट इक्विटी में ट्रांसफर होगा. 

मान लीजिए 10,000 रुपए आपको हर महीने ट्रांसफर करना है. तो आपका 1 लाख रुपए का अमाउंट 10 महीनों में 10-10 हजार करके डेट फंड से ट्रांसफर हो कर इक्विटी फंड में जाएगा. इस तरह व्‍यवस्थित तरीके से पैसा एक म्यूच्युअल फंड से ट्रांसफर होकर दूसरे म्यूच्युअल फंड में चला जाता है. आमतौर पर इस प्‍लान को चुनने की सलाह तब दी जाती है, जब आप इक्विटी फंड में एकमुश्‍त रकम निवेश करना चाहते हैं, लेकिन इससे जुड़े उतार चढ़ाव से बचना चाहते हैं.

SIP या STP किसे चुनना बेहतर?

SIP और STP दोनों ही निवेश के व्‍यवस्थित तरीके हैं. दोनों में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है. हालांकि दोनों के मकसद अलग-अलग हैं. SIP उन निवेशकों के लिए बेहतर है जो एकमुश्‍त रकम की बजाय छोटी-छोटी रकम को व्‍यवस्थित तरीके से लंबे समय तक निवेश करके बड़ा फंड बनाना चाहते हैं. वहीं जो निवेशक इक्विटी स्कीम में अपना पूरा पैसा एक बार में निवेश करने से हिचकते हैं, वे STP ऑप्‍शन चुन सकते हैं. एकमुश्त पैसा इक्विटी में डालना रिस्की हो सकता है. कुल मिलाकर एसआईपी और एसटीपी में से किसमें निवेश किया जाए ये फैसला निवेशक के फाइनेंशियल गोल पर निर्भर करता है.