सोलर टेक्नोलॉजी सनलाइट को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में कन्वर्ट करने का काम करती है. ये या तो फोटोवोल्टेइक पैनल के जरिए हो सकता है या फिर या फिर मिरर के जरिए किया जाता है. इस तरह की शक्ति का यूज कई जगहों पर किया जा सकता है. इसे स्टोर भी किया जा सकता है. सोलर एनर्जी के कमाल दिखाने खा उदाहरण हाल ही में सामने आया है. भारत ने साल की शुरुआती 6 महीनों में ही अरबों रुपए की बचत की है. एक रिपोर्ट की मानें तो भारत ने सौर उर्जा का यूज करते हुए लगभग 190 लाख टन कोयला बचा लिया है. सौर उर्जा के जरिए पारंपरिक ईंधन के स्रोतों में कमी आ रही है, और गैस कोयले के इस्तेमाल से बचते हुए करोड़ों रुपए की बचत की जा रही है.  कोयले की इस बचत से घरेलू सप्लाई को भी एक बड़ी मदद मिली है. साथ ही ‘सेंटर ऑफ रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ और ‘इंस्टिट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स फाइनेंशियल एनालिसिस’ ने भी सोलर पावर ग्रोथ की बारे में जानकारी दी है. पिछली रिपोर्ट में 1 दशक का हिसाब देखा गया है. और इससे ये पता लगा कि सूअर ऊर्जा ने कीं देशों में प्रोग्रेस की है. सोलर पॉवर के क्षेत्र में दुनिया के टॉप 10 इकोनॉमी में 5 देश एशिया के हैं. इनमें चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया और वियतनाम शामिल हैं. 

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कोल-गैस का खर्चा कम 

सोलर एनर्जी से हुई बचत ने एक दशक में जीवाश्म ईंधन पर होने वाले खर्च को कम से कम 9% तक बचा लिया है. इसी तरह भारत ने सोलर एनर्जी का यूज करते हुए कोयले, गैस के खर्च पर लगभग 320 अरब रुपए की बचत कर ली है. ये बचत इस साल के शुरुआत 6 महीने में ही कर ली गई. साथ ही 190 लाख टन कोयले का खर्च भी घटा. रिपोर्ट की मानें तो सोलर एनर्जी के जरिये चीन ने सबसे अधिक खर्च की बचत की है. चीन में 34 अरब डॉलर तक की बचत की गई है.चीन में कुल बिजली का 5% हिस्सा सौर ऊर्जा से आता है. चीन ने 21 अरब डॉलर के कोयले और गैस की बचत की है.