Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने 1 फरवरी, 2023 को यूनियन बजट में लैब ग्रोन डायमंड (LGD) बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले सीड्स पर 5 फीसदी सीमा शुल्क हटा दिया है. लैब में तैयार किए गए हीरों के उत्पादन की लागत को कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है. वित्त मंत्री ने अपने बजट स्पीच में कहा कि लैब ग्रोच डायमंड में रोजगार के काफी मौके हैं और यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर लैब ग्रोन डायमंड होता क्या है और LGD और डायमंड में क्या अंतर होता है. इसके साथ ही जानेंगे कि लैब ग्रोन डायमंड खरीदना कितना सही है और इसके क्या फायदे हैं.

बजट में लैब ग्रोन डायमंड पर ऐलान

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट स्पीच में कहा कि लैब ग्रोन डायमंड के उत्पादन पर फोकस बढ़ेगा. इसके रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए IIT मद्रास को 5 साल के लिए ₹242 करोड़ का ग्रांट दिया जाएगा. लैब ग्रोन डायमंड के रॉ मटेरियल पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म किया जाएगा.

 

क्या है लैब ग्रोन डायमंड?

  • लेबोरेटरी में बनकर तैयार होता है
  • तैयार होने में 35-45 दिन लगते हैं
  • कलर, डिजाइन, चमक, कटिंग नेचुरल डायमंड जैसी
  • नेचुरल डायमंड से करीब 70% सस्ता

कैसे बनता है लैब ग्रोन डायमंड

  • इसे बनाने के 2 तरीके होते हैं
  • एक तरीका, CVD यानी Chemical Vapour Decomposition
  • दूसरा तरीका, HPHT यानी High Pressure High Temperature
  • कार्बन सीड की जरुरत होती है
  • सीड एक अहम रॉ मटेरियल है
  • कार्बन सीड चीन से इंपोर्ट होता है

भारत में लैब ग्रोन डायमंड का मार्केट

  • डायमंड इंडस्ट्री का 10% हिस्सा
  • 2020-21 में एक्सपोर्ट में 102% का उछाल
  • 2022-23 में एक्सपोर्ट करीब 60% उछला
  • पिछले 3 सालों में एक्सपोर्ट में 60-70% का उछाल
  • करीब 80% कट एंड पॉलिश्ड LGD एक्सपोर्ट
  • LGD यानी लैब ग्रोन डायमंड
  • देश में 20% LGD की खपत
  • US,  हॉन्ग कॉन्ग, UAE जैसे देशों को एक्सपोर्ट

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