Delhi High Court on Hotel Association:  होटल एसोसिएशन को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सर्विस चार्ज पर गुमराह करने पर एसोसिएशन को दिल्ली उच्च न्यायालय ने फटकार लगाई है. हाइकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के अंतरिम आदेश का बहाना बनाकर ग्राहक को गुमराह नहीं करें. इसके अलावा सर्विस चार्ज को दूसरे नाम देखकर इसे ग्राहकों से वसूली न करने के लिए भी निर्देश दिए हैं. 

इन नाम से न करें ग्राहकों से वसूली

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दिल्ली हाईकोर्ट ने होटल एसोसिएशन को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा है कि अंतरिम आदेश को गेट,दीवारों और मेन्यू पर दर्शाने का मतलब यह निकल रहा है कि कोर्ट ने सर्विस चार्ज को वैध करार दे दिया है. सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा था कि रेस्त्रां और होटल इस तरह का दुरुपयोग कर रहे हैं. साथ ही सर्विस चार्ज को स्टाफ वेलफेयर फंड, कंट्रीब्यूशन ऑर स्टाफ चार्ज जैसे नाम से वसूली को बंद होनी चाहिए.

हाईकोर्ट में दाखिल करना होगा एफिडेविट

हाईकोर्ट ने होटल एसोसिएशन से कहा है कि वह ऐफिडेविट दाखिल कर बताएं कि कितने मेंबर ग्राहकों को ये बताना चाहते हैं कि " सर्विस चार्ज अनिवार्य नहीं है (Service Charge is not MANDATORY)". कोर्ट ने दो हफ्ते में सभी सहमत मेंबर की पूरी लिस्ट के साथ ऐफिडेविट देने को कहा है. अब इस मामले पर 24 जुलाई को अगली सुनवाई होगी. आपको बता दें कि जुलाई में सिंगल जज बेंच ने इससे जुड़े निर्देश दिए हैं. एडिशनल सॉलिस्टर जनरल ने कोर्ट को बताया कि कई रेस्टोरेंट इस आदेश का उपयोग कर अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या कर रहे हैं.  

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फेडरेशन ऑफ होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया और नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए ) के दिशा निर्देशों को चुनौती दी थी. जस्टिस प्रतिभा. एम. सिंह की बेंच चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.