बिहार में ठंड के मौसम में बढ़ते वायु प्रदूषण की आशंका को लेकर सरकार पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त नज़र आ रही है. सरकार ने साफ कर दिया है कि फसल अवशेष जलाने वाले किसानों से इस वर्ष भी धान की खरीद नहीं की जाएगी. इसके साथ ही जो किसान पराली को जलाएंगे उन्हें डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के लिए मिलने वाले अनुदान से भी वंचित किया जाएगा. सरकार को आशंका है कि ठंड के मौसम में वायु प्रदूषण बढ़ेगा और यही कारण है कि सरकार किसानों पर सख्त नजर आ रही है.

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पराली जलाने पर सख्ती

बिहार सरकार का ये साफ कहना है कि जो किसान पराली जलाएंगे उन किसानों पर सख्ती बरती जाएगी साथ ही उन्हें डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के लिए मिलने वाले अनुदान से भी वंचित किया जाएगा. बिहार में ठंड के मौसम में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर ही सरकार ने ये फैसला लिया है. 

वायु प्रदूषण का बढ़ रहा स्तर 

कहा जा रहा है कि अक्टूबर महीने में ही एसर क्वीलिटि इंडेक्स के अनुसार वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता दिख रहा है, जैसे-जैसे धान कटनी का समय आएगा स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, इसलिए अभी से अधिकारी सतर्कता बरतना शुरू करें.

ऐसे ब्लॉक्स और पंचायतों पर विशेष निगाह रखने को कहा गया है जहां से किसानों द्वारा पराली जलाने की शिकायत पहले मिलती आ रही है. 

ऐसे होता है पराली से प्रदूषण 

जिलाधिकारियों को फसल कटनी के पूर्व कंबाइन हार्वेस्टर मालिक, संचालक के साथ बैठक कर उन्हें फसल अवशेष न जलाने के लिए सचेत करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

ध्यान देने वाली बात ये है कि इससे पहले भी धान की खूंटी, पुआल आदि खेतों में जलाने की बजाए उचित प्रबंधन का निर्देश कृषि विभाग द्वारा दिया गया था. धान की कटाई के बाद किसान अपने खेतों के अंदर ही फसलों के अवशेष यानी पराली को जला देते हैं. जिससे वायुमंडल को भी नुकसान पहुंचता है और वायु प्रदूषण भी घातक हो जाता है.