Telangana Vidhan Sabha Counting LIVE Updates: तेलंगाना में विधानसभा की 119 सीट के लिए मतों की गिनती रविवार सुबह आठ बजे शुरू हो गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को सुरक्षित तरीके से स्ट्रांग रूम से बाहर निकाला गया और मतगणना केंद्रों पर रखा गया है. इन केन्द्रों पर पुलिस ने त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है. सुबह आठ बजे सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की गई. अधिकारियों ने बताया कि साढ़े आठ बजे के बाद ईवीएम के जरिए डाले गए वोटों की गिनती की जा रही है.

मैदान में कौन-कौन?

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तेलंगाना विधानसभा चुनाव में 2,290 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख चंद्रशेखर राव, उनके बेटे और सरकार में मंत्री के. टी. रामा राव, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य बंदी संजय कुमार, डी. अरविंद और सोयम बापू राव शामिल हैं.

बीआरएस ने राज्य की सभी 119 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि चुनाव पूर्व समझौते के तहत भाजपा और जनसेना ने क्रमश: 111 और आठ सीट पर चुनाव लड़ा है। वहीं, कांग्रेस ने अपनी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को एक सीट दी.

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम नौ विधानसभा सीट पर चुनाव मैदान में थी. केसीआर (चंद्रशेखर राव) दो विधानसभा क्षेत्रों - गजवेल व कामारेड्डी से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि रेवंत रेड्डी-कोडंगल और कामारेड्डी से चुनाव मैदान में हैं. भाजपा ने अपने विधायक एटाला राजेंदर को हुजूराबाद के अलावा गजवेल से भी मैदान में उतारा है, जहां से वह मौजूदा विधायक भी हैं.

तेलंगाना में 30 नवंबर को हुए चुनाव में कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं में से 71.34 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था.

दो सीटों से चुनाव लड़े केसीआर

केसीआर (चंद्रशेखर राव) दो विधानसभा क्षेत्रों-गजवेल व कामारेड्डी से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि रेवंत रेड्डी-कोडंगल और कामारेड्डी से चुनाव मैदान में हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान पार्टियों ने अपनाई ये रणनीति

BRS का प्रचार अभियान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की विफलताओं और किसानों व महिलाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित रहा. राव ने तेलंगाना को राज्य का दर्जा दिलाने में अपने संघर्ष की बात को भी जोर-शोर से उठाया.

वहीं, कांग्रेस ने अपने प्रचार अभियान के दौरान बीआरएस सरकार के कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और अपनी ‘छह गारंटी’ तथा शासन में ‘बदलाव’ की आवश्यकता पर जोर दिया.

बीजेपी  ने अपने प्रचार अभियान के दौरान ‘डबल इंजन सरकार’, केसीआर के ‘परिवारवाद’ और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा और राज्य में सरकार बनने पर पिछड़ी जाति के नेता को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया.