वैश्विक व्यापार में दवा (Pharma), रत्न-आभूषण (Gems and Jewellery), चमड़ा (Leather) और फुटवियर क्षेत्रों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी 2015 की तुलना में 2022 में कम हो गई है. शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

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रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, पेट्रोलियम, वाहन कलपुर्जे, लोहा एवं इस्पात और एल्युमिनियम के उत्पादों के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है. GTRI के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, मुख्य रूप से कीमत के मुद्दों के बजाय गुणवत्ता पर चिंता के कारण परिधान, चमड़ा, जूते और समुद्री उत्पादों जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी कम हो रही है.

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रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार में भारत की उच्च हिस्सेदारी वाले प्रमुख क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिकल उपकरण के साथ-साथ मशीनरी शामिल हैं. बता दें कि ये उत्पाद समूह वैश्विक व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं, जो 6,000 अरब डॉलर से भी ज्यादा है. श्रीवास्तव ने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत की ऐतिहासिक रूप से कम हिस्सेदारी धीरे-धीरे लेकिन निर्णायक रूप से सुधर रही है.

GTRI ने कहा, वैश्विक व्यापार में वस्तुओं के मामले में भारत की हिस्सेदारी 2022 में 1.8% थी. हालांकि, 2015 में मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स में इसकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.75% और 0.4% थी. सात वर्षों के दौरान, इन क्षेत्रों में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण सुधार हुआ है.

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गुणवत्ता के मुद्दे दवा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि झींगा और झींगे जैसे भारतीय जलीय कृषि उत्पादों को भी प्रभावित करते हैं.

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