रिपोर्ट : भूपेंद्र सोनी

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अगर आप GST भरते हैं तो नये ढंग से बिल बनाने का तरीका सीख लें. GST के लिए ई-इनवॉइस बिलिंग सिस्टम को सरकार जरूरी बनाने जा रही है. 1 अप्रैल 2020 से ई-इनवॉइस सिस्टम जरूरी होगा. ये अनिवार्यता 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए होगी और केवल बिजनेस टू बिजनेस वाले लेन-देन के लिए ही होगी.

इससे पहले सरकार 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए 1 जनवरी 2020 से इसे स्वैच्छिक तौर पर लागू करेगी. इसके बाद 1 फरवरी को 100 करोड़ रुपए टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए यह लागू हो जाएगा. यह भी स्वैच्छिक रहेगा लेकिन अप्रैल से यह अनिवार्य हो जाएगा. वहीं 100 करोड़ रुपए टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए यह स्वैच्छिक ही बना रहेगा.

ई-इनवॉइस बिलिंग सिस्टम के तहत इनवॉइस प्रणाली में खास तरह से सभी जगह समान प्रारूप के बिल बनाए जाएंगे. यह बिल सभी जगह एक समान रूप से बनेंगे और रीयल टाइम दिखाई देंगे यानि अभी कोई किसी सामान को आइटम लिख रहा है, कोई प्रोडक्ट लिख रहा है और छूट के लिए कोई डिस्काउंट लिख रहा है. कोई एग्जम्पशन लिख रहा है...ऐसा नहीं चलेगा. इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस बिलिंग सिस्टम में हर एक हेड को स्टैंडर्ड फॉर्मेट में लिखा जाएगा.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिल बनाने के बाद कई जगह फाइलिंग नहीं करनी पड़ेगी. हर महीने GST रिटर्न भरने के लिए अलग इनवॉइस एंट्री होती है. सालाना रिटर्न भरने के लिए अलग एंट्री होती है और ई-वे बिल बनाने के लिए अलग एंट्री करनी होती है. अब अलग-अलग फाइलिंग नहीं करनी पड़ेगी. 

एक बार इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस सिस्टम में आएगा तो वह जहां-जहां उसकी जरूरत होगी वहां-वहां अपने आप ही पहुंच जाएगा. इसके लिए इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल अलग से बनेगा जो हर बिल के लिए एक नंबर जनरेट करेगा. 

ई-साइन भी होगा QR कोड भी आएगा, जिसमें सारी जानकारी रहेगी. इनवॉइस जीएसटी से संबंधित किसी भी काम के लिए वह नंबर मैच होते ही प्रोसेस आसान हो जाएगा. सामान भेजने वाला (Supplier) और लेने वाला (Receiver) बिल को रियल टाइम देख सकेंगे. अभी बिल बनने के बाद फिजिकली या दूसरे तरीकों से भेजना पड़ता है.

वही MSME कंपनियों को आसानी से लोन मिल सकेगा. सरकार और संबंधित बैंक या एजेंसीज को ई-इनवॉइस से रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी. इससे कारोबारियों, व्यापारियों का बिजनेस आसान होगा. रिटर्न भरने में भी आसानी होगी और प्रोसेसिंग भी जल्द होगी. वित्त मंत्रालय GSTN के माध्यम से अलग-अलग शहरों में कारोबारियों, व्यापारियों को ई-इनवॉइस बनाने का तरीका सिखाने के लिए वर्कशॉप में ट्रेनिंग की व्यवस्था करेगी.