अक्टूबर-नवंबर आते ही देश में धान की फसल की कटाई शुरु हो गई है. फसल की कटाई के बाद जो अवशेष बचता है, इसको पराली के नाम से जाना जाता है. ज्यादातर किसान पराली को जलाते हैं. जिस कारण उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रदूषण चरम पर है. इससे निपटने के लिए हरियाणा सरकार एक नया तरीका लेकर आई है. हरियाणा सरकार किसानों को पराली नहीं जलाने पर एक हजार रुपये प्रति एकड़ की रकम देगी. पराली जलाना पर्यावरण के लिए भी खतरा है इसलिए सरकार किसानों को ये समय-समय पर समझाने की कोशिश करती है.  पराली जलाने खतरा तो है लेकिन अगर किसान इसे समझदारी से यूज करते हैं तो इससे पैसा भी कमाया जा सकता है. इसलिए किसानों को पराली निस्तारण के लिए जागरूक किया जा रहा है. 

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किसानों को कैसे होगा स्कीम का फायदा

हरियाणा सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम में सीटू और एक्स सीटू मैनेजमेंट के तहत किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ की राशि मिलेगी. किसान इस योजना का लाभ हरियाणा सरकार की मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ले सकते हैं. इसके साथ ही हरियाणा सरकार पराली को एमएसपी पर खरीदना शुरु कर रही है. जिससे किसान पराली को बेचकर बढ़िया लाभ कमा सकते हैं. 

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क्या है इस स्कीम की खासियत

हरियाणा सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों को पराली जलाने के विकल्प को उपलब्ध कराना है. साथ ही इस योजना के तहत किसानों को आर्थिक लाभ भी मिले इसका भी सरकार ने ध्यान रखा है. हरियाणा सरकार पराली की गांठे बेलर मशीनों की मदद से बनाने का तरीका सिखाएगी. इन गांठों को किसान बेचकर अच्छा लाभ कमा सकता है. साथ ही मशीनों के माध्यम से कैसे धान की फानों को दबाया जा सकता है, इस तरीके को भी बताया जाएगा. हरियाणा सरकार फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम के अंर्तगत मशीनों पर सब्सिडी भी दे रही है. इस स्कीम के तहत किसानों को कृषि की मशीनों पर 50 से 60 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है. जिसका उपयोग कर किसान आसानी से पराली का निपटान किया जा सकता है.