देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड 5-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी 2020 से पहले किए जाने के पक्ष में नहीं है. कंपनी ने कहा कि उद्योग को अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के लिए भारत से जुड़े बदलाव करने के लिए समय चाहिए. वोडाफोन आइडिया के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) विशान्त वोरा ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि पिछले साल इस बड़े विलय के बाद दो दूरसंचार नेटवर्क का एकीकरण सही राह पर है और इसके जून, 2020 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है.

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चीन के वेंडरों के दूरसंचार उपकरणों के इस्तेमाल पर छिड़ी बहस पर वोरा ने कहा कि भारत सरकार ने इस तरह के उपकरणों के इस्तेमाल पर रुख नहीं बनाया है. उन्होंने कहा कि कंपनी इस बारे में भारत के नियमों का अनुपालन करेगी. उन्होंने कहा कि जहां तक भारत के रुख का सवाल है हमारी सरकार ने आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे देशों की तरह अपना रवैया स्पष्ट नहीं किया है. निश्चित रूप से भारत सरकार जो भी फैसला करेगी हम उसका अनुपालन करेंगे. 

पिछले साल आइडिया और वोडाफोन ने अपने भारतीय परिचालन का विलय किया था. इससे देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी अस्तित्व में आई थी, जो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगी. विलय के बाद बनी इस इकाई में ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन की 45.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है. कुमार मंगलम बिड़ला की अगुवाई वाले आदित्य बिड़ला समूह के पास 26 प्रतिशत तथा आइडिया के शेयरधारकों के पास 28.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है. 

यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी इसी साल 5-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के पक्ष में है, वोरा ने कहा कि कंपनी के पास मौजूदा स्पेक्ट्रम से ही करीब 5-जी सेवाएं देने की क्षमता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह अच्छा होगा कि स्पेक्ट्रम की नीलामी 2020 के बाद की जाए.