डिजिटल पेमेंट्स ईकोसिस्टम की ग्रोथ के मिक्स रिजल्ट देखकर वित्त मंत्रालय चिंतित है. यही वजह है कि वित्त मंत्रालय ने रुपे डेबिट कार्ड और BHIM-UPI से होने वाली कम वैल्यू वाले ट्रांजेक्शन को तीसरे साल भी बढ़ावा देने का फैसला किया है. इसके लिए इंसेटिव की समय-सीमा को बढ़ाया जा रहा है. वहीं नए प्लेयर्स को आकर्षित करने के लिए बजट को भी लगभग दोगुना किया जा रहा है.

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वित्त मंत्रालय का प्लान 2023-24 करीब 5016 करोड़ रुपये खर्च करने का है. यह पिछले साल 2022-23 में 2600 करोड़ रुपये था. इन पैसों का इस्तेमाल एमडीआर रेट के डिस्काउंट से निपटने के लिए होगा. बता दें कि एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस होती है, जिसे मर्चेंट से लिया जाता है और उसे 

भुगतान की सुविधा देने वाले बैंक को चुकाया जाता है.

इस स्कीम के तहत पीओएस मशीन या ई-कॉमर्स साइट पर रुपे कार्ड्स से की गईं कम वॉल्यूम ट्रांजेक्शन के लिए मर्चेंट के बैंक को 0.4 फीसदी इंसेंटिव दिया जाता है. इस इंसेंटिव के लिए हर ट्रांजेक्शन पर 100 रुपये की कैपिंग भी है.

इंडस्ट्री प्रोग्राम के मामलों में, जिनमें इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स, सरकार, एजुकेशन, रेलवे, एग्रीकल्चर, फ्यूल, ज्वेलरी, अस्पताल, टेलीकॉम, यूटिलटी पेमेंट्स, बिजनेस/पर्सनल सर्विस में रुपे कार्ड का इस्तेमाल होता है, वहां हर ट्रांजेक्शन पर 0.15 फीसदी का इंसेंटिव दिया जाता है, जो अधिकतम 6 रुपये हो सकती है.

इसी तरह किसी शख्स से मर्चेंट को किए जाने वाले भुगतान यानी P2M पेमेंट्स, जिसमें 2000 रुपये तक की ट्रांजेक्शन पर BHIM-UPI का इस्तेमाल होता है, उसमें बैंक को 0.25 फीसदी का ट्रांजेक्शन अमाउंट इंसेंटिव की तरह दिया जाता है. इंडस्ट्री प्रोग्राम के लिए यह इंसेंटिव 0.15 फीसदी होता है.

इस स्कीम की शुरुआत वित्त वर्ष 2021-22 में की गई थी और उस वक्त इसका बजट 1450 करोड़ रुपये रखा गया था. इसका भुगतान एक्वायरर बैंक ने कार्ड जारी करने वाले बैंक और नेटवर्क ऑपरेटर को किया. वहीं भीम-यूपीआई के मामले में एक्वायरर बैंक की तरफ से एमडीआर को इश्यूअर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, थर्ड पार्टी प्रोवाइडर और अन्य सिस्टम पार्टिसिपेंट के साथ शेयर किया.

भारत में डिजिटल पेमेंट ट्रांजेक्शन बढ़ रही हैं, लेकिन नतीजे मिले-जुले हैं, जिनमें यूपीआई वॉल्यूम और वैल्यू दोनों ही मामलों में तेजी से बढ़ रहा है. वॉल्यूम के मामले में 2022-23 में यूपीआई पेमेंट ट्रांजेक्शन 82 फीसदी बढ़ी हैं, जबकि वैल्यू के मामले में इसमें 105 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर रुपे कार्ड से ट्रांजेक्शन के मामले में वॉल्यूम की बात करें तो 13.7 फीसदी की गिरावट है और वैल्यू के मामले में गिरावट 4.2 फीसदी है.

इन मिले-जुले नतीजों ने वित्त मंत्रालय को रूपे डेबिट कार्ड पर योजना में बदलाव करना पड़ा. साथ ही यूपीआई लाइट, यूपीआई लाइटएक्स, यूपीआई कन्वर्सेशनल पेमेंट्स- ऐप में हैलो यूपीआई और भीम-यूपीआई प्लेटफॉर्म पर यूपीआई 123पे को भी इसमें जोड़ने का प्रस्ताव है. इसके लिए प्रेरित करते हुए शर्त रखी है कि योजना की अंतिम तिमाही के दौरान कम से कम 5 प्रतिशत भीम-यूपीआई पी2एम लेनदेन यूपीआई लाइट और यूपीआई लाइटएक्स पर होंगे.

यूपीआई लाइट स्मार्ट फोन पर 2,000 रुपये तक की राशि के लिए भीम-यूपीआई ऐप में एक वॉलेट प्रदान करता है. इससे भुगतान करते समय उपयोगकर्ता को पहले अपने बैंक से इलेक्ट्रॉनिक ऑथराइजेशन लेने की जरूरत खत्म हो जाती है. UPI LiteX उपयोगकर्ताओं को बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों, जैसे रिमोट लोकेशन में भी लेनदेन करने की सुविधा देता है.

सूत्रों ने बताया है कि स्कीम को एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी की तरफ से अप्रूवल मिल गया है और अब कैबिनेट अप्रूवल का इंतजार है, जिसके बाद तिमाही आधार पर डिसबर्समेंट शुरू होगा. हालांकि, इस बार इसे फाइनेंशियल सर्विसेस विभाग (DFS) की तरफ से Promotion of Digital Payments की तरफ लागू किया जा रहा है. जुलाई 2023 में इसे मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) से DFS को ट्रांसफर किया गिया था.