&format=webp&quality=medium)
वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच चल रहा कूटनीतिक मामले ने शनिवार को एक बड़ा मोड़ ले लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान यात्रा को रद्द कर दिया. इस प्रतिनिधिमंडल में उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल थे.
इस्लामाबाद में ईरान के साथ शांति वार्ता का दूसरा दौर होना था, लेकिन ट्रंप के एक कड़े फैसले ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. इस्लामाबाद में इस सप्ताह के अंत में जो कूटनीतिक हलचल होने वाली थी, वह अब पूरी तरह से ठंडी पड़ गई है.
ट्रंप ने पोस्ट में कहा, "मैंने अपने प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद (पाकिस्तान) जाकर ईरानियों से मिलने वाली यात्रा रद्द कर दी है. यात्रा में बहुत समय बर्बाद हो रहा था और काम भी बहुत है. इसके अलावा, उनकी “लीडरशिप” के अंदर काफी आपसी झगड़ा और भ्रम है. उन्हें खुद भी नहीं पता कि असल में जिम्मेदारी किसके पास है. हमारे पास सारे पत्ते (ताकत) हैं, उनके पास कुछ भी नहीं है. अगर वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस फोन करना है!"

ट्रंप का यह फैसला उस समय आया जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार शाम इस्लामाबाद से रवाना हो गया. अरागची ने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं. साथ ही अमेरिका और इजरायल के लिए अपनी "आधिकारिक मांगों की सूची" भी दी.
अरागची अब पाकिस्तान से ओमान और रूस की यात्रा पर निकल गए हैं. उन्होंने टेलीग्राम पर दिए एक बयान में कहा कि उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायली सेना द्वारा "थोपे गए युद्ध" को पूरी तरह खत्म करने और युद्धविराम के बारे में ईरान का पक्ष मजबूती से रखा है.
पाकिस्तान इस वार्ता के जरिए खुद को एक बड़े ग्लोबल 'ब्रोकर' के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था. लेकिन ईरान की विदाई और ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल न भेजने के फैसले ने पाकिस्तान की इन महत्वाकांक्षाओं को बिखेर दिया है.
यह घटनाक्रम पिछले दौर की विफलताओं की याद दिलाता है. इस्लामाबाद में ही हुई पहली दौर की वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसदीय अध्यक्ष एम.बी. गालिबफ के बीच 21 घंटे तक लंबी चर्चा चली थी, लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला था.
ट्रंप का यह कदम पश्चिम एशिया के संकट में अमेरिका की 'प्रेशर पॉलिटिक्स' को दर्शाता है. वे चाहते हैं कि ईरान खुद बातचीत की पहल करे, न कि अमेरिका बार-बार लंबी यात्राएं करके कूटनीतिक टेबल पर बैठे. पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक हार है, क्योंकि वह इस क्षेत्र में अपनी अहमियत साबित करने की कोशिश कर रहा था. अब देखना होगा कि अरागची की रूस और ओमान यात्रा से इस संघर्ष में क्या नया मोड़ आता है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 ट्रंप ने इस्लामाबाद की यात्रा क्यों रद्द की?
ट्रंप का मानना है कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और बिना किसी ठोस नतीजे के 18 घंटे की लंबी यात्रा करना समय की बर्बादी है.
Q2 जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ कौन हैं?
जेरेड कुशनर ट्रंप के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार हैं, जबकि स्टीव विटकॉफ पश्चिम एशिया के लिए ट्रंप के विशेष दूत हैं.
Q3 वार्ता का पहला दौर कहां हुआ था और क्या नतीजा रहा?
पहला दौर भी इस्लामाबाद में हुआ था, जो 21 घंटे तक चला लेकिन बिना किसी सफलता के खत्म हो गया.
Q4 क्या पाकिस्तान अभी भी मध्यस्थता कर सकता है?
फिलहाल यह मुश्किल लग रहा है क्योंकि दोनों ही पक्षों (अमेरिका और ईरान) ने बातचीत के बजाय अपनी शर्तों को आगे रखा है.
Q5 क्या रूस इस मामले में कोई भूमिका निभा सकता है?
ईरान के विदेश मंत्री अब रूस जा रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि ईरान अब अमेरिका के बजाय रूस जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीति बना सकता है.