ये देश रूस से खरीदता है सबसे ज्‍यादा तेल...फिर अमेरिका भारत पर क्‍यों फोड़ रहा 'टैरिफ बम’?

रूस से तेल खरीदने के मामले में एक देश भारत से भी आगे है. इतना ही नहीं, रूस से LNG-PNG की सर्वाधिक खरीदारी करने के मामले में भारत अव्‍वल नहीं है. फिर अमेरिका भारत पर ही ये 'टैरिफ बम’ क्‍यों फोड़ रहा है?
ये देश रूस से खरीदता है सबसे ज्‍यादा तेल...फिर अमेरिका भारत पर क्‍यों फोड़ रहा 'टैरिफ बम’?

अमेरिका ने पहले भारत पर 25% का टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. 25% का टैरिफ आज से लागू हो रहा है. फिर अचानक 6 अगस्‍त को उन्‍होंने भारत पर 25% का अतिरिक्‍त टैरिफ थोप दिया. इसका कारण बताया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है तो 25% का अतिरिक्‍त टैरिफ जुर्माने के तौर पर लगाया जा रहा है. जुर्माने वाला 25% का अतिरिक्‍त टैरिफ 27 अगस्‍त से प्रभावी होगा. अतिरिक्‍त टैरिफ लगने के बाद भारत को 50% टैरिफ देना होगा.

लेकिन सवाल ये है कि अमेरिका का ये टैरिफ बम भारत पर क्‍यों फूट रहा है. जबकि रूस से तेल खरीदने के मामले में एक देश भारत से भी आगे है. इतना ही नहीं, रूस से LNG-PNG की सर्वाधिक खरीदारी करने के मामले में भारत आगे नहीं है. फिर ये टैरिफ बम फोड़कर किस बात की खुन्‍नस निकाल रहा है अमेरिका. यहां जानिए रूस से तेल खरीद के मामले में कौन सा देश है अव्‍वल.

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चीन है सबसे बड़ा खरीदार

रूस से सर्वाधिक तेल खरीदने वाले देश की बात करें तो इस मामले में चीन अव्‍वल है. भारत इस लिस्‍ट में दूसरे नंबर पर है. दिसंबर 2022 से जुलाई 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि:

  • चीन ने रूस के 47% कच्चे तेल का आयात किया
  • भारत ने 38% खरीदा
  • यूरोप और तुर्की ने 6-6% लिया

इन आंकड़ों के आधार पर ये कहा जा सकता है कि भारत रूस से सबसे ज्‍यादा तेल खरीदने वाले देशों की लिस्‍ट में शामिल जरूर है, लेकिन सर्वाधिक तेल खरीदने वाला देश नहीं है. लेकिन चीन पर अमेरिका ने 30% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर 50% टैरिफ थोप दिया है.

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क्‍या भारत रूस से गैस खरीदता है?

अगर बात LNG और PNG की करें तो हकीकत ये है कि यूरोपीय यूनियन (EU) रूस से सबसे ज्‍यादा LNG और PNG खरीदता है. रूस से पीएनजी का करीब 37% और एलएनजी का करीब 47% निर्यात रूस से होता है. इसके अलावा फ्रांस, हंगरी, नीदरलैंड और स्लोवाकिया जैसे देश प्रमुख खरीदार हैं.

क्या पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाए हैं?

सच्चाई ये है कि रूस के तेल पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है जैसा ईरान या वेनेजुएला पर है. बल्कि, G7 देशों और यूरोपीय संघ ने एक ‘प्राइस कैप’ यानी मूल्य सीमा तय की है, जिससे रूस का राजस्व तो घटे, लेकिन दुनिया में तेल की आपूर्ति बनी रहे. भारत इसी नियम के तहत सस्ता तेल खरीदता है और सब कुछ कानूनी तरीके से करता है.

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भारत पर टैरिफ लगने से क्‍या होगा?

टैरिफ का असर ये होगा कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे और इनकी डिमांड कम हो जाएगी. भारत अमेरिका में कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स, गहने और रत्न, इंजीनियरिंग का सामान और ऑटो पार्ट्स, मसाले और कृषि उत्पाद वगैरह तमाम चीजों का निर्यात करता है, टैरिफ बढ़ने से इनकी मांग पर असर पड़ेगा. हालांकि भारतीय व्‍यापारियों का मानना है कि वे अब दुनिया के दूसरे देशों में व्‍यापार की हिस्‍सेदारी को बढ़ा सकते हैं.

ब्राजील और भारत पर सबसे ज्‍यादा टैरिफ

ब्राजील को छोड़कर भारत पर अमेरिकी टैरिफ अब दुनिया में सबसे ज्‍यादा है. अमेरिका ने ब्राजील पर भी 50% का ही टैरिफ लगाया है. वहीं चीन पर 30% और पाकिस्‍तान पर 19% टैरिफ लगाया है. भारत पर 25% का अतिरिक्‍त टैरिफ 27 अगस्‍त से प्रभावी होगा. हालांकि, भारत के एक्सपोर्टर्स का कहना है कि माल बेचने के किए उनके पास अमेरिका के अलावा दुनिया भर के बाजार हैं. ऐसे में भारतीय व्‍यापारी दुनिया के अन्‍य देशों में अपनी हिस्‍सेदारी बढ़ा सकते हैं.

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