&format=webp&quality=medium)
अमेरिका में ट्रेड टैरिफ को लेकर बड़ा कानूनी मोड़ आया है. असल मेंअमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने फैसला दिया है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) का भुगतान किया था, उन्हें अब उसका रिफंड मिल सकता है. यह फैसला तब आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इन टैरिफ को रद्द कर दिया था.
ऐसे में न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने बुधवार को एक आदेश दिया कि कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) उन कंपनियों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया शुरू करे, जिनसे यह शुल्क लिया गया था. ये टैरिफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए थे.
कोर्ट ने साफ कहा है कि जिन भी इम्पोर्टर्स ने इन टैरिफ का भुगतान किया था, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ लेने के हकदार हैं.असल में यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि इन टैरिफ से सरकार को करीब 130 अरब डॉलर की कमाई हुई थी.
फेडएक्स जैसी कई बड़ी कंपनियों ने पहले ही टैरिफ रिफंड के लिए केस दायर कर रखा है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि सरकार जल्द ही 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू कर सकती है, जो पुराने टैरिफ की जगह ले सकता है.

फिलहाल कंपनियां इस फैसले को बड़ी राहत मान रही हैं और अब सबकी नजर इस पर है कि टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होगी.
आपको बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में 6-3 के फैसले से ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था.असल में कोर्ट ने कहा कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को ऐसे व्यापक आयात चार्ज लगाने की शक्ति नहीं देता है.
दरअसल ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में “लिबरेशन डे टैरिफ” की घोषणा की थी. इसके तहत कई देशों पर 10% से लेकर 50% तक आयात चार्ज लगाया गया था. वैसे इन टैरिफ में मैक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों से आने वाले सामान भी शामिल थे.असल में इन चार्ज से अमेरिकी सरकार को करीब 130 अरब डॉलर की कमाई हुई थी.
हालांकि कोर्ट ने रिफंड का रास्ता साफ कर दिया है, लेकिन पैसा वापस करने की पूरी प्रक्रिया अभी साफ नहीं हुई है.कई कंपनियां पहले ही अदालत पहुंच चुकी हैं. आपको बता दें कि छोटे कारोबारियों के एक समूह We Pay the Tariffs ने इस फैसले को बड़ी जीत बताया है. वैसे सरकार के सामने हजारों नए मुकदमे आ सकते हैं और कुल रिफंड राशि 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है.
माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ की तैयारी में भी है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि ग्लोबल टैरिफ को करीब 10% से बढ़ाकर 15% किया जा सकता है.यह नया टैक्स उन टैरिफ की जगह ले सकता है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.

ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत पर भी कड़े टैरिफ लगाए थे. “लिबरेशन डे टैरिफ” के तहत भारत पर करीब 25% चार्ज लगाया गया था और रूसी तेल खरीद को लेकर 25% एक्स्ट्रा टैक्स की बात भी सामने आई थी.हालांकि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड फ्रेमवर्क समझौता हुआ है, जिसके बाद टैरिफ को घटाकर करीब 18% तक लाने की चर्चा है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कंपनियों को टैरिफ रिफंड कब और कैसे मिलेगा.वैसे साफ है कि कोर्ट का यह फैसला ट्रंप की ट्रेड और इकोनॉमिक पॉलिसी पर बड़ा असर डाल सकता है.
1. US Tariff Refund क्या है?
यह वह पैसा है जो अमेरिकी कंपनियों ने आयात शुल्क के रूप में चुकाया था और अब कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें वापस मिल सकता है
2. यह टैरिफ किसने लगाया था?
ये टैरिफ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने IEEPA कानून के तहत लगाए थे
3. कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन को कंपनियों को टैरिफ रिफंड देने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है
4. कंपनियों को कितना पैसा वापस मिल सकता है?
अनुमान है कि इन टैरिफ से करीब 130 अरब डॉलर जुटाए गए थे, जिनमें से बड़ी रकम कंपनियों को लौटानी पड़ सकती है
5. क्या अमेरिका नया टैरिफ लागू कर सकता है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सरकार पुराने टैरिफ की जगह लगभग 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लागू कर सकती है