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इजरायल को समझा रहे ट्रंप, नेतन्याहू कर रहे हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
मध्य पूर्व में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. एक तरफ इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लगातार हमले हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई देश और संयुक्त राष्ट्र इस लड़ाई को रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
यहां तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर उन्हें बेरूत में बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटने के लिए राजी किया. इसी बीच ईरान ने भी बड़ा बयान देकर क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है. ईरान का कहना है कि अगर इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इसका असर क्षेत्र के अहम समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है.
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी ने कहा कि लेबनान और गाजा में इजरायल की कार्रवाई जारी रहने पर ईरान और उसके सहयोगी ऐसे हालात पैदा कर सकते हैं जिनका असर होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर पड़ सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरे क्षेत्र में पहले से ही तनाव काफी बढ़ा हुआ है.
CNBC को दिए एक एक्सक्लूसिव टेलीफोनिक इंटरव्यू डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत रुक भी जाये तो कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं बोर हो चुका हूं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम ईरान पर बम गिराएंगे. हां आर्थिक नाकेबंदी जरूर सख्त करेंगे. क्योंकि ये ज्यादा असरदार है.
फ्रांस की मांग पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई. बैठक में फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को समझा जा सकता है, लेकिन लेबनान पर हमले और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन सही नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने इजरायल से सैन्य कार्रवाई रोकने और लेबनान से सेना हटाने की अपील की. फ्रांस ने यह भी कहा कि वह लेबनानी सेना को 39 बख्तरबंद वाहन देगा और हालात सामान्य होने पर उसके समर्थन में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा.
कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद लेबनान में हिंसा जारी रही. सैदोन जिले के मरवानियेह इलाके में हुए इजरायली हवाई हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई. वहीं टायर जिले के बाजूरियेह में एक अन्य हमले में तीन लोग घायल हुए.
दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसने इजरायल के मालोट-तर्शीहा इलाके में सैनिकों को निशाना बनाया. संगठन ने दक्षिणी लेबनान के ओदाइसेह क्षेत्र में भी इजरायली सैनिकों पर हमला करने की बात कही.
इजरायली सेना ने बताया कि मंगलवार तड़के लेबनान से दागे गए दो प्रोजेक्टाइल को उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया. सेना के मुताबिक इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है.
हिज्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि उनका संगठन पूरे लेबनान में पूर्ण युद्धविराम का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि अगर लड़ाई रुकती है तो उसके बाद इजरायली सेना को भी लेबनान से वापस जाना चाहिए.
लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय ने भी कहा कि हिज्बुल्लाह ने पारस्परिक रूप से हमले रोकने पर सहमति जताई है. हालांकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में अपनी योजना के मुताबिक कार्रवाई जारी रखेगी.
संयुक्त राष्ट्र ने बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है. महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी लेबनान और आसपास के इलाकों में बढ़ता सैन्य तनाव बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को संघर्ष विराम का सम्मान करना चाहिए.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात कर उन्हें बेरूत में बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटने के लिए राजी किया.
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधियों से बातचीत की और दोनों पक्षों ने गोलीबारी रोकने पर सहमति जताई है. हालांकि जमीन पर अभी भी हमलों की खबरें सामने आ रही हैं.
इस बीच IRGC ने दावा किया कि उसने पनामा के झंडे वाले और अमेरिकी स्वामित्व वाले MSC Sariska V कंटेनर जहाज को क्रूज मिसाइल से निशाना बनाया है. ईरानी मीडिया ने इस कार्रवाई को ओमान के पास एक ईरानी जहाज पर हुए पुराने हमले से जोड़कर देखा है.
वहीं ब्रिटेन की समुद्री निगरानी एजेंसी ने भी पुष्टि की कि खाड़ी क्षेत्र में एक मालवाहक जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, हालांकि जहाज का नाम नहीं बताया गया.
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अगले सप्ताह तक युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर कोई समझौता हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है.
फिलहाल हालात ऐसे हैं कि एक तरफ युद्धविराम की बातें हो रही हैं, जबकि दूसरी तरफ जमीन पर हमले भी जारी हैं. ऐसे में पूरे मध्य पूर्व की नजर आने वाले दिनों में होने वाले कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर टिकी हुई है.