अमेरिका में ट्रंप की इंडिया टैरिफ नीति पर घमासान! डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा- खत्म करो भारत पर लगा एक्स्ट्रा टैरिफ

अमेरिका के तीन हाउस मेंबर्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इंडिया पर लगाए गए भारी टैरिफ के खिलाफ रेजोल्यूशन पेश किया है. उनका कहना है कि ये टैरिफ गैरकानूनी हैं और अमेरिकी वर्कर्स, कंज्यूमर्स व US-India रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
अमेरिका में ट्रंप की इंडिया टैरिफ नीति पर घमासान! डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा- खत्म करो भारत पर लगा एक्स्ट्रा टैरिफ

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी एक बार फिर विवादों में आ गई है. शुक्रवार को US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों ने एक रेजोल्यूशन पेश किया, जिसमें इंडिया पर लगाए गए भारी टैरिफ को खत्म करने की मांग की गई है. यह रेजोल्यूशन ट्रंप द्वारा घोषित नेशनल इमरजेंसी के तहत लगाए गए टैरिफ को सीधे तौर पर चुनौती देता है.

IEEPA के तहत 50 फीसदी तक पहुंचा टैरिफ

ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत पहले 25 फीसदी का टैरिफ लगाया था. इसके बाद 27 अगस्त 2025 को 25 फीसदी की अतिरिक्त सेकेंडरी ड्यूटी जोड़ दी गई. इसके चलते कई इंडियन प्रोडक्ट्स पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच गया, जिससे ट्रेड बुरी तरह प्रभावित हुआ.

गैरकानूनी कदम

रेजोल्यूशन लाने वाले सांसदों का कहना है कि इमरजेंसी पावर का इस तरह इस्तेमाल करना कांग्रेस की संवैधानिक ताकत को कमजोर करता है. उनका आरोप है कि ट्रंप ने ट्रेड जैसे अहम मुद्दे पर कांग्रेस को बायपास कर फैसला लिया, जो संविधान की भावना के खिलाफ है.

नॉर्थ कैरोलिना और इंडिया का मजबूत बिजनेस रिश्ता

रिप्रेजेंटेटिव डेबोरा रॉस ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना की इकॉनमी का इंडिया से गहरा रिश्ता है. इंडियन कंपनियों ने वहां एक अरब डॉलर से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट किया है, जिससे लाइफ साइंसेज और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हजारों नौकरियां बनी हैं. हर साल सैकड़ों मिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट भी इंडिया को किया जाता है.

आम अमेरिकियों की जेब पर असर

टेक्सास से सांसद मार्क वीसी ने कहा कि ये टैरिफ आम अमेरिकियों के लिए टैक्स जैसे हैं. पहले से महंगाई झेल रहे परिवारों के लिए रोजमर्रा के सामान और ज्यादा महंगे हो गए हैं. उनका कहना है कि इंडिया जैसे भरोसेमंद पार्टनर पर इस तरह का दबाव गलत संदेश देता है.

सप्लाई चेन को नुकसान

भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इन टैरिफ को काउंटरप्रोडक्टिव बताया. उन्होंने कहा कि इससे सप्लाई चेन टूटती है, अमेरिकी वर्कर्स को नुकसान होता है और कंज्यूमर्स पर बोझ बढ़ता है. उनके मुताबिक इंडिया के साथ मजबूत ट्रेड रिश्ते अमेरिका की स्ट्रैटेजिक जरूरत भी हैं.

सीनेट में भी दिखा विरोध का सुर

इससे पहले US सीनेट में भी ब्राजील पर लगाए गए टैरिफ हटाने को लेकर बाइपार्टीजन कोशिश देखी गई थी. साथ ही प्रेसिडेंट की इमरजेंसी पावर को सीमित करने की मांग उठी थी. हाउस का यह रेजोल्यूशन उसी कड़ी का अगला कदम माना जा रहा है.

रूस ऑयल खरीद बना टैरिफ की वजह

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इंडिया की रूस से ऑयल खरीद यूक्रेन युद्ध को फंड कर रही है. इसी वजह से 1 अगस्त को 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया और कुछ दिनों बाद इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया. हालांकि आलोचकों का कहना है कि फॉरेन पॉलिसी के मुद्दों को ट्रेड टूल से हल करना सही नहीं है.

कांग्रेस बनाम ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी

डेमोक्रेट्स इसे कांग्रेस की संवैधानिक ताकत वापस लेने की लड़ाई बता रहे हैं. अक्टूबर में भी 20 से ज्यादा सांसदों ने ट्रंप से इंडिया पर लगाए गए टैरिफ वापस लेने की मांग की थी. अब यह रेजोल्यूशन उसी राजनीतिक लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया है.

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह रेजोल्यूशन हाउस में पास हो पाता है और क्या इससे ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी पर ब्रेक लगता है. साथ ही यह भी तय होगा कि US-India रिश्तों में आई तल्खी कितनी जल्दी दूर हो पाती है.

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