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अमेरिका की जीडीपी (GDP) विकास दर महज 1.4% दर्ज की गई है.
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 की आखिरी तिमाही (अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर) में अमेरिका की जीडीपी (GDP) विकास दर महज 1.4% दर्ज की गई है. अगर इसकी तुलना तीसरी तिमाही से करें, जहां विकास दर 4.4% थी, तो यह एक बहुत बड़ी गिरावट है.
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा विलेन बनकर उभरा है 'सरकारी शटडाउन'. अक्टूबर और नवंबर 2025 के दौरान हुए इस शटडाउन की वजह से न सिर्फ डेटा आने में देरी हुई, बल्कि विकास की पटरी भी डगमगा गई. ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस (BEA) ने साफ किया है कि इस शटडाउन ने जीडीपी ग्रोथ में से करीब 1 परसेंट का हिस्सा छीन लिया.
चौथी तिमाही में सुस्ती के कई कारण रहे. जहां एक तरफ आम लोगों ने खर्च जारी रखा और कंपनियों ने निवेश भी किया, वहीं दूसरी तरफ सरकारी मोर्चे पर बड़ी गिरावट देखी गई.
सरकारी खर्च में कमी: शटडाउन की वजह से केंद्र सरकार का खर्च कम हो गया. डिफेंस और नॉन-डिफेंस, दोनों ही क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी और कामकाज ठप होने का सीधा असर आंकड़ों पर दिखा.
निर्यात (Exports) का गिरना: अमेरिका से बाहर जाने वाले सामानों में कमी आई, जिससे जीडीपी को मिलने वाला सहारा कम हो गया.
उपभोक्ता खर्च की धीमी चाल: लोग पैसे तो खर्च कर रहे हैं, लेकिन तीसरी तिमाही जैसी तेजी अब गायब है.

भले ही आंकड़े सुस्त हों, लेकिन कुछ मोर्चों पर मजबूती अभी भी बरकरार है. चौथी तिमाही में जीडीपी को सहारा देने वाले दो ही मुख्य स्तंभ रहे, कंज्यूमर स्पेंडिंग और इन्वेस्टमेंट.
हेल्थकेयर और ट्रैवल: लोगों ने सेवाओं (Services) पर खूब खर्च किया. इसमें अस्पताल, नर्सिंग होम और अंतरराष्ट्रीय यात्रा सबसे आगे रहे. हालांकि, सामानों (Goods) की खरीदारी में थोड़ी कमी देखी गई.
टेक्नोलॉजी और रिसर्च: कंपनियों ने बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और कंप्यूटर जैसे उपकरणों पर निवेश बढ़ाया. रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में भी तेजी देखी गई, जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं.
अक्टूबर 1 से नवंबर 12 तक चले इस शटडाउन ने अमेरिका को गहरा जख्म दिया है. BEA का अनुमान है कि सरकारी कर्मचारियों के काम पर न होने की वजह से जो सेवाएं प्रभावित हुईं, उससे जीडीपी ग्रोथ को सीधा 1% का घाटा हुआ.
हालांकि कर्मचारियों को बाद में पिछला वेतन (Back Pay) मिल गया, लेकिन काम का जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई नहीं हो सकी. इसकी वजह से डेटा जुटाने में भी दिक्कत आई और अक्टूबर की महंगाई के आंकड़ों के लिए अनुमानों का सहारा लेना पड़ा.
अगर पूरे साल 2025 की बात करें, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कुल बढ़त 2.2% रही. यह 2024 की 2.8% की ग्रोथ के मुकाबले थोड़ी कम है. पूरे साल महंगाई का इंडेक्स (PCE Price Index) 2.6% पर स्थिर रहा, जो पिछले साल के बराबर ही था. लेकिन अगर खाने-पीने और एनर्जी के सामानों को छोड़ दें, तो कोर महंगाई में हल्की गिरावट देखी गई है, जो 2.9% से घटकर 2.8% पर आ गई है.
इस रिपोर्ट में एक और अनोखी बात सामने आई. निर्यात (Exports) के आंकड़ों में से BEA ने चांदी की ईंटों (Silver Bars) के निर्यात को बाहर कर दिया है. वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल जब निवेश के तौर पर किया जाता है, तो उसे जीडीपी के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता. इसे सिर्फ एक 'वेल्थ स्टोर' माना जाता है, न कि कोई सर्विस या गुड्स का प्रोडक्शन.
| Q3 2025 | 4.4% | मजबूत खपत और निवेश |
| Q4 2025 | 1.4% | शटडाउन, सरकारी खर्च में कमी |
| पूरा साल 2025 | 2.2% | उपभोक्ता खर्च और R&D निवेश |
अमेरिका की 2025 की आखिरी तिमाही की रिपोर्ट यह साफ करती है कि सरकारी स्थिरता किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी जरूरी है. शटडाउन ने न केवल विकास की रफ्तार रोकी, बल्कि दुनिया के सामने अमेरिकी आर्थिक ढांचे की कमजोरी भी उजागर की. हालांकि उपभोक्ता खर्च और टेक्नोलॉजी में निवेश अभी भी उम्मीद की किरण जगाए हुए हैं, लेकिन 1.4% की यह सुस्त रफ्तार साल 2026 के लिए बड़ी चुनौतियां पेश कर रही है.