अमेरिका की GDP पर दिखने लगा ट्रंप के टैरिफ का असर, व्यापार घाटा 5 साल के निचले स्तर पर

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिकी व्यापार घाटा 2020 के मध्य के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. व्हाइट हाउस के मुताबिक एक्सपोर्ट बढ़ा, इंपोर्ट घटा और चीन के साथ ट्रेड बैलेंस में बड़ा सुधार हुआ, जिससे GDP को भी सहारा मिला.
अमेरिका की GDP पर दिखने लगा ट्रंप के टैरिफ का असर, व्यापार घाटा 5 साल के निचले स्तर पर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी. ग्लोबल बाजार में ये कयास लगाए जा रहे थे कि इस नीति से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा.

लेकिन अब सामने आए ताजा आंकड़े बिल्कुल अलग तस्वीर दिखा रहे हैं. व्हाइट हाउस के मुताबिक अमेरिका का व्यापार घाटा 2020 के मध्य के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

कितना घटा अमेरिका का व्यापार घाटा?

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पिछले साल की तुलना में अमेरिकी व्यापार घाटे में 35 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. प्रशासन इसे ट्रंप की टैरिफ आधारित ट्रेड रणनीति का सीधा असर बता रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि इस नीति की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आई है और व्यापार प्रदर्शन में तेज सुधार देखने को मिल रहा है.

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि एक्सपोर्ट बढ़ाने, इंपोर्ट में कमी लाने और खासतौर पर चीन के साथ व्यापार घाटे को घटाने पर फोकस किया गया. इसी रणनीति के चलते मौजूदा हालात बने हैं. प्रशासन ने इन आंकड़ों को राष्ट्रपति के ‘अमेरिका फर्स्ट’ ट्रेड एजेंडा का नतीजा बताया है. उसका कहना है कि ये वही एजेंडा है, जो सालों से चली आ रही उन नीतियों के उलट है, जिनसे अमेरिकी उत्पादकों को नुकसान होता था.

अमेरिकी एक्सपोर्ट बढ़ा

प्रेस रिलीज के मुताबिक अमेरिकी एक्सपोर्ट एक साल पहले की तुलना में 6 प्रतिशत बढ़ा है. महंगाई के हिसाब से एडजस्ट किए गए कंज्यूमर गुड्स के एक्सपोर्ट को अब तक का सबसे बड़ा बताया गया है. प्रशासन इसे इस बात का संकेत मान रहा है कि अमेरिकी उत्पादों की ग्लोबल मांग बढ़ रही है और दुनिया के बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत हो रही है.

इसी दौरान चीन के साथ मौसम के हिसाब से एडजस्ट किया गया अमेरिकी ट्रेड घाटा 2009 के बाद से अपने दूसरे सबसे छोटे स्तर पर आ गया है. ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ ट्रेड को फिर से बैलेंस करना अपनी आर्थिक रणनीति का मुख्य स्तंभ बनाया हुआ है. बाजार तक पहुंच और ट्रेड प्रैक्टिस में बदलाव के लिए अमेरिका ने टैरिफ के दबाव का इस्तेमाल किया, जिसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है.

व्हाइट हाउस की रिलीज में 2025 की तीसरी तिमाही का भी जिक्र किया गया है. इसके अनुसार इस अवधि में वास्तविक एक्सपोर्ट 4.1 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ा, जबकि इंपोर्ट में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई. प्रशासन का कहना है कि इसी वजह से वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP में करीब एक प्रतिशत प्वाइंट का इजाफा हुआ.

नवंबर के आंकड़े क्या कहते हैं?

नवंबर महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी साफ हो जाती है. व्हाइट हाउस के मुताबिक नवंबर में व्यापार घाटा पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 50 प्रतिशत से ज्यादा घट गया. इस तेजी से आए सुधार का श्रेय टैरिफ रेवेन्यू में बढ़ोतरी को दिया गया है. प्रशासन का तर्क है कि ज्यादा एक्सपोर्ट, कम इंपोर्ट और बढ़े हुए टैरिफ का ये कॉम्बिनेशन अमेरिकी वर्कर्स, किसानों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बराबरी का मैदान तैयार कर रहा है.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मौजूदा ट्रेड हालात दशकों पुरानी उन कमजोर नीतियों से बिल्कुल अलग हैं, जिनमें दूसरे देशों को अमेरिकी बाजार में अपने प्रोडक्ट बेचने को ज्यादा तवज्जो दी गई थी. उस दौर में, प्रशासन के मुताबिक, अमेरिकी उत्पादकों की पहुंच सीमित रह गई थी. इस पैटर्न को बदलने के लिए ट्रंप ने ट्रेडिंग पार्टनर्स को बातचीत की टेबल पर लाने के लिए टैरिफ को हथियार बनाया.

'हमारी पहुंच विकसित और उभरती दोनों अर्थव्यवस्थाओं तक'

रिलीज में अप्रैल में घोषित किए गए जिस ट्रेड एजेंडा को ऐतिहासिक बताया गया था, उसके बारे में भी विस्तार से बात की गई है. प्रशासन का कहना है कि इस एजेंडा ने अमेरिका को नए और बेहतर ट्रेड डील हासिल करने के लिए अभूतपूर्व ताकत दी. ये समझौते ग्लोबल GDP के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर करते हैं.

इन पार्टनर्स में यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ, जापान, चीन और रिपब्लिक ऑफ कोरिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इसके अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, फिलीपींस, कंबोडिया, अल सल्वाडोर, इक्वाडोर, अर्जेंटीना, ग्वाटेमाला, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन का भी जिक्र किया गया है. प्रशासन का दावा है कि इससे साफ होता है कि उसकी ट्रेड रणनीति की पहुंच विकसित और उभरती दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं तक रही है.

'अमेरिका में बढ़ेगा रोजगार'

व्यापार संतुलन के साथ-साथ व्हाइट हाउस ने टैरिफ रणनीति को घरेलू निवेश की बढ़ती लहर से भी जोड़ा है. रिलीज में कहा गया है कि कई कंपनियों ने खरबों डॉलर के नए निवेश की घोषणा की है. ये कंपनियां दूसरे देशों से अपने कर्मचारियों को वापस ला रही हैं और हजारों नई अमेरिकी नौकरियां पैदा कर रही हैं.

प्रशासन का कहना है कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं अमेरिका को फ्यूचर की नौकरियों के लिए एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रही हैं. इससे यह तर्क भी मजबूत होता है कि ट्रेड पॉलिसी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल और रोजगार रणनीति का भी एक अहम हिस्सा हो सकती है.

आखिर में व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी व्यापार घाटा उस अंतर को मापता है, जो देश द्वारा इंपोर्ट किए जाने वाले सामान और सेवाओं के मूल्य और एक्सपोर्ट किए जाने वाले सामान और सेवाओं के मूल्य के बीच होता है.

खबर से जुड़े FAQs

अमेरिकी व्यापार घाटा क्या होता है?

यह देश के इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के मूल्य के बीच के अंतर को दिखाता है.

ट्रंप प्रशासन व्यापार घाटे में कमी का श्रेय किसे दे रहा है?

प्रशासन इसे टैरिफ आधारित ट्रेड रणनीति का नतीजा बता रहा है.

अमेरिकी एक्सपोर्ट में कितना इजाफा बताया गया है?

व्हाइट हाउस के अनुसार एक्सपोर्ट एक साल में 6 प्रतिशत बढ़ा है.

चीन के साथ अमेरिकी ट्रेड घाटे में क्या बदलाव आया है?

यह 2009 के बाद अपने दूसरे सबसे छोटे स्तर पर आ गया है.

टैरिफ रणनीति को निवेश से कैसे जोड़ा गया है?

प्रशासन के मुताबिक टैरिफ के बाद कई कंपनियों ने बड़े घरेलू निवेश की घोषणा की है.

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