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अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस वक्त एक अजीब कशमकश से गुजर रही है. एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि 2026 का वसंत (Spring) इतिहास का सबसे बड़ा 'टैक्स रिफंड सीजन' होगा, जिससे लोगों की जेबें भर जाएंगी. लेकिन दूसरी तरफ, 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ईरान युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार में आग लगा दी है.
आज स्थिति यह है कि सरकार की तरफ से मिलने वाला रिफंड का पैसा लोगों के बैंक खातों में रुकने के बजाय सीधे पेट्रोल पंपों की मशीनों में जा रहा है. आइए, अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाली इस 'दोहरी मार' के असर को विस्तार से समझते हैं.
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दिसंबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने वादा किया था कि टैक्स कटौती के चलते अमेरिकियों को इस साल बड़ा रिफंड मिलेगा. लेकिन युद्ध ने सारा गणित बिगाड़ दिया है.
बढ़ता खर्च: 'टैक्स फाउंडेशन' के अनुसार, एक औसत अमेरिकी परिवार को इस साल $748 का अतिरिक्त रिफंड मिलने की उम्मीद थी.
गैस का झटका: स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट (SIEPR) के निदेशक नील महोनी के अनुसार, बढ़ती तेल कीमतों की वजह से एक औसत परिवार को इस साल गैस पर $740 ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे.
नतीजा: रिफंड से मिलने वाली खुशी लगभग शून्य हो गई है. $748 मिले और $740 पेट्रोल में उड़ गए यानी आम आदमी के पास कुछ नया खरीदने के लिए सिर्फ $8 बचे.
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अर्थशास्त्री इस वक्त एक खास शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे 'रॉकेट और पंख' कहा जाता है.
रॉकेट: जब युद्ध या संकट शुरू होता है, तो गैस की कीमतें 'रॉकेट' की तरह ऊपर भागती हैं. (सिर्फ एक महीने में कीमतें $1 से ज्यादा बढ़कर $3.94 पर पहुंच गईं).
पंख: जब युद्ध खत्म भी हो जाए, तो कीमतें 'पंख' की तरह बहुत धीरे-धीरे नीचे आती हैं. इसका मतलब है कि मई तक गैस $4.36 प्रति गैलन तक पहुंच सकती है और साल के अंत तक ऊंची बनी रहेगी.
इस आर्थिक झटके का असर सब पर एक जैसा नहीं है. इसे अर्थशास्त्री 'K-शेप्ड' अर्थव्यवस्था कह रहे हैं:
ऊपरी हिस्सा (अमीर): अमीर परिवार अपनी आय का केवल 1.5% हिस्सा गैस पर खर्च करते हैं. उनके पास बैंक बैलेंस है, इसलिए उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा.
निचला हिस्सा (गरीब/मध्यम वर्ग): सबसे गरीब 10% लोग अपनी आय का करीब 4% हिस्सा पेट्रोल पर खर्च करते हैं. उनके पास कोई बचत (Cushion) नहीं बची है.
द सेंचुरी फाउंडेशन की प्रेसिडेंट जूली मार्गेटा मॉर्गन का कहना है- "लोग अब ग्रॉसरी (किराना) खरीदने के लिए 'अभी खरीदें, बाद में चुकाएं' (Buy Now, Pay Later) और क्रेडिट कार्ड का सहारा ले रहे हैं. यह स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है."
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ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर इस साल गिरकर 1.9% रह सकती है.
वजह: जब लोग पेट्रोल पर ज्यादा खर्च करते हैं, तो वह रेस्तरां जाना, नए कपड़े खरीदना और घूमना-फिरना कम कर देते हैं.
नौकरियां: 2022 के यूक्रेन युद्ध के समय कंपनियों के पास पैसा था और वह भर्तियां कर रही थीं. लेकिन 2026 में हायरिंग (Hiring) लगभग ठप है और लोगों की बचत दर ऐतिहासिक रूप से गिर चुकी है.
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्री अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं, क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता पहले भी कई झटकों (महंगाई, ऊंची ब्याज दरें) को झेल चुका है. लेकिन 'बैंक ऑफ अमेरिका' का डेटा बताता है कि लोग अब केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च कर रहे हैं.
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अमेरिका के लिए 'टैक्स रिफंड' का जो सपना ट्रंप ने दिखाया था, उसे ईरान युद्ध की लपटों ने झुलसा दिया है. अर्थव्यवस्था फिलहाल बढ़ तो रही है, लेकिन उसकी रफ्तार बहुत धीमी पड़ गई है. अगर गैस की कीमतें मई तक $4.36 के पार जाती हैं, तो मध्यम वर्ग के लिए अपनी जीवनशैली को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिकी प्रशासन इस 'एनर्जी शॉक' से निपटने के लिए कोई नया कदम उठाता है या नहीं.
1- ईरान युद्ध से गैस की कीमतें क्यों बढ़ीं?
युद्ध के कारण तेल की सप्लाई और शिपिंग (Strait of Hormuz) बाधित हुई है, जिससे कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल आया है.
2- क्या ट्रंप का टैक्स रिफंड बेकार चला गया?
बेकार नहीं, लेकिन उसका जो 'बूस्ट' अर्थव्यवस्था को मिलना था, वह बढ़ी हुई महंगाई और गैस की कीमतों में बराबर (Offset) हो गया है.
3- 'K-शेप्ड' रिकवरी का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि समाज का एक हिस्सा (अमीर) अमीर होता जा रहा है और दूसरा हिस्सा (गरीब) महंगाई के बोझ तले दब रहा है.
4- मई 2026 में गैस की कीमत क्या हो सकती है?
गोल्डमैन सैक्स के अनुमानों के आधार पर गैस की कीमतें $4.36 प्रति गैलन तक पहुंच सकती हैं.
5- क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी (Recession) में चली जाएगी?
फिलहाल विकास दर 1.9% रहने का अनुमान है, जो मंदी तो नहीं है, लेकिन विकास की रफ्तार काफी धीमी है.
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