Passport Ranking 2025: भारत ने मारी 8 पायदान की छलांग, पहली बार टॉप-10 से बाहर हुआ अमेरिका!

Henley Passport Index 2025 में अमेरिका पहली बार टॉप-10 से बाहर हो गया है. सिंगापुर नंबर-1 पर बना हुआ है, जबकि भारत 77वें स्थान पर पहुंच गया है. जानिए पासपोर्ट की ताकत कैसे तय होती है और किन देशों में भारतीयों को वीजा-फ्री एंट्री मिलती है.
Passport Ranking 2025: भारत ने मारी 8 पायदान की छलांग, पहली बार टॉप-10 से बाहर हुआ अमेरिका!

Henley Passport Index 2025: पासपोर्ट को किसी भी देश की वैश्विक पहचान और ट्रैवल पावर का प्रतीक माना जाता है. लेकिन 2025 में जारी हुए Henley Passport Index ने दुनियाभर को चौंका दिया है. इस साल पहली बार अमेरिकी पासपोर्ट (US Passport) टॉप 10 की सूची से बाहर हो गया है. वहीं, भारत ने अपनी रैंकिंग में 8 पायदान की छलांग लगाई है. लंदन स्थित संस्था Henley & Partners हर साल यह इंडेक्स जारी करती है, जो International Air Transport Association (IATA) के डेटा पर आधारित होता है.

कैसे तय होती है पासपोर्ट की ताकत?

Henley Passport Index किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत इस बात पर मापता है कि उस पासपोर्ट से बिना वीजा (Visa-Free) या वीजा ऑन अराइवल (Visa on Arrival) कितने देशों में यात्रा की जा सकती है. जितने अधिक देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा मिलेगी, उतना ही पासपोर्ट “मजबूत” माना जाता है.

उदाहरण के लिए - अगर कोई पासपोर्ट धारक 193 देशों में बिना वीजा जा सकता है, तो वह दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट कहलाता है.

अमेरिका 20 साल बाद टॉप 10 से बाहर!

Henley Passport Index 2025 के मुताबिक, अमेरिका अब 12वें स्थान पर है, मलेशिया के साथ टाई में. इसका मतलब यह है कि अमेरिकी पासपोर्ट से अब 180 देशों में ही बिना वीजा यात्रा की जा सकती है, जबकि पहले यह संख्या 185 से ज्यादा थी.

अमेरिका की रैंकिंग गिरने की बड़ी वजहें, ब्राज़ील ने 2025 में अमेरिकी नागरिकों पर वीजा फिर से लागू किया. चीन और वियतनाम ने अमेरिका को अपने वीजा-फ्री प्रोग्राम से बाहर रखा. वहीं, चीन ने जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों को वीजा-फ्री सूची में शामिल कर लिया.

Henley & Partners के चेयरमैन क्रिश्चियन एच. कैलीन ने कहा, “अमेरिकी पासपोर्ट की कमजोरी दर्शाती है कि वैश्विक सहयोग कम होने से ‘सॉफ्ट पावर’ भी घटती है. जो देश खुले और सहयोगी हैं, उनकी ट्रैवल फ्रीडम लगातार बढ़ रही है.”

भारत की बड़ी छलांग

भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग 2025 में 85वें से बढ़कर 77वें स्थान पर पहुंच गई है. अब भारतीय नागरिक करीब 60 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल के साथ जा सकते हैं. भारतीय नागरिकों को अब जिन देशों में वीजा फ्री या ऑन अराइवल सुविधा है, उसमें श्रीलंका और फिलिपींस सहित भूटान, बारबाडोस, कंबोडिया, अंगोला, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, बुरुंडी, केप वर्डे आदि देश शामिल हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की रैंकिंग में सुधार की वजह बेहतर द्विपक्षीय संबंध और नई वीजा एग्रीमेंट्स हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी की “वैश्विक गतिशील भारत” नीति का परिणाम है.

चीन का भी जबरदस्त उछाल

चीन ने पिछले दशक में सबसे बड़ी छलांग लगाई है. 2015 में रैंक जहां चीन की रैकिंग 94वें स्थान पर थी, जो कि अब 64वें स्थान पर पहुंच चुकी है. अब चीन के नागरिक 37 नए देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं, जिनमें रूस, खाड़ी देश और यूरोप के कई देश शामिल हैं.

सबसे कमजोर पासपोर्ट कौन से हैं?

Henley Passport Index 2025 के निचले हिस्से में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है.

  • अफगानिस्तान सिर्फ 24 देशों में वीजा-फ्री
  • सीरिया – 26 देश
  • इराक – 29 देश

ये तीनों देश दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों में गिने जाते हैं.

FAQs

1. Henley Passport Index क्या है?

यह एक वार्षिक रिपोर्ट है जो बताती है कि किसी देश का पासपोर्ट कितने देशों में बिना वीजा यात्रा की सुविधा देता है.

2. 2025 में कौन सा पासपोर्ट सबसे ताकतवर है?

सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे मजबूत है, जिससे 193 देशों में बिना वीजा यात्रा की जा सकती है.

3. अमेरिका की रैंकिंग क्यों गिरी?

कई देशों ने अमेरिका को वीजा-फ्री सूची से हटा दिया है, जैसे ब्राजील, चीन और वियतनाम, जिससे उसका प्रभाव घटा है.

4. भारत का पासपोर्ट कितने देशों में मान्य है?

भारतीय नागरिक अब करीब 60 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल के साथ यात्रा कर सकते हैं.

5. अफगानिस्तान का पासपोर्ट सबसे कमजोर क्यों माना जाता है?

क्योंकि अफगान नागरिकों को सिर्फ 24 देशों में ही बिना वीजा एंट्री की सुविधा मिलती है, जो सबसे कम है.

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