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विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने शनिवार को बताया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर (British Prime Minister Keir Starmer) 8 और 9 अक्टूबर को भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा.
इस यात्रा के दौरान दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों (Bilateral Relations), आर्थिक साझेदारी (Economic Partnership) और निवेश (Investment Opportunities) जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे. विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा भारत-ब्रिटेन के बीच सहयोग को नई दिशा देगा.
हाल ही में जुलाई में भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर हुए थे. इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कपड़ा (Textiles), व्हिस्की (Whisky) और कारों (Cars) जैसे उत्पादों पर शुल्क (Tariffs) घटाने का फैसला किया था.
इससे दोनों देशों के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. इससे ब्रिटिश और भारतीय कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में ज्यादा पहुंच मिलेगी. 3 साल की लंबी बातचीत के बाद मई में यह समझौता फाइनल हुआ था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कीयर स्टार्मर की सरकार ने जुलाई में सील किया.
स्टार्मर की इस यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन कई अहम मुद्दों पर बात करेंगे. इनमें शामिल हैं:
विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह दौरा दोनों देशों के लिए “भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने का मौका” साबित होगा.
भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध पहले से ही कई क्षेत्रों में मजबूत हैं, खासकर व्यापार, शिक्षा और तकनीकी सहयोग में. अब इस नए दौरे से उम्मीद है कि दोनों देश मिलकर नए निवेश प्रोजेक्ट्स और जॉब क्रिएशन पर काम करेंगे.
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस विजिट से भारत को यूरोपीय मार्केट में और गहराई से प्रवेश करने का मौका मिलेगा. वहीं ब्रिटेन को भारत जैसे बड़े उभरते बाजार से नए निवेश और साझेदारी के अवसर मिलेंगे.
कीयर स्टार्मर का यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगी और नए बिजनेस अवसरों की राह खोलेगी.
8 और 9 अक्टूबर 2025 को यह यात्रा तय की गई है.
वह ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री हैं.
भारत-ब्रिटेन के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना.
संभावना है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर आगे की बातचीत होगी.
इससे दोनों देशों के व्यापार पर टैक्स घटेगा और बाजारों तक पहुंच आसान होगी.
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