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(प्रतीकात्मक फोटो :AI)
Iran-US War: ईरान-यूएस तनाव में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान (Pakistan) की मुश्किलें बढ़ गई हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे देश को अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा झटका दे दिया है. UAE ने पाकिस्तान को दिया गया 3.5 अरब डॉलर का कर्ज इस महीने के अंत तक वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया है. यह कर्ज 2019 से लगातार रोलओवर किया जा रहा था, लेकिन अब यूएई ने इसे तुरंत वापस मांग लिया है.
यूएई की तरफ से कर्ज चुकाने की अवधि को बार-बार बढ़ाया जा रहा था. हालांकि, अब यूएई ने पाकिस्तान से इस महीने के अंत तक सारा कर्ज वापस करने के लिए कहा है.
यूएई का झटका- यूएई ने कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ाने से इनकार करते हुए सारा पैसा इसी महीने वापस मांगा है.
विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव- मौजूदा समय में पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में 21 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि है. 3.5 अरब डॉलर चुकाने के बाद रिजर्व में बड़ी गिरावट आएगी, जिससे पाकिस्तानी रुपये की कीमत गिर सकती है.
कर्ज का बोझ- पाकिस्तान पर दिसंबर 2025 तक कुल विदेशी कर्ज 138 अरब डॉलर पहुंच चुका है.
IMF की शर्तें- पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है. यूएई का पैसा वापस करने से आईएमएफ के साथ मौजूदा समझौतों और शर्तों पर बुरा असर पड़ सकता है.
आगामी भुगतान- अप्रैल 2026 में पाकिस्तान को 1.3 अरब डॉलर के यूरो बॉन्ड का भुगतान भी करना है.
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पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति
न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने पाकिस्तानी मीडिया डॉन के हवाले से रिपोर्ट में अधिकारी ने बताया कि अबू धाबी ने रकम तुरंत वापस करने की मांग की थी. यह रकम जल्द से जल्द वापस कर दी जाएगी. वित्तीय कारणों से राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता.
ये फंड 2019 में यूएई द्वारा पाकिस्तान के पेमेंट बैलेंस को स्थिर करने में मदद के लिए दिए गए बाहरी फाइनेंसिंग सपोर्ट का हिस्सा थे. अधिकारी ने कहा कि इस फैसले से अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए जमा किए गए डिपॉजिट को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है, जिसे 2019 से कई बार रोलओवर किया गया था.
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| कर्जदाता | राशि ($) |
| चीन | $29 अरब |
| सऊदी अरब | $9.16 अरब |
| UAE | $3.5 अरब |
| IMF | $7.29 अरब |
अपने चल रहे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड प्रोग्राम के तहत, पाकिस्तान को रिजर्व लेवल बनाए रखने और बाहरी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए तीन मुख्य पार्टनर- चीन, सऊदी अरब और यूएई- से लगभग 12.5 अरब डॉलर का रोलओवर हासिल करने की जरूरत है. इसलिए, यूएई के डिपॉजिट इस व्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा थे.

अगर नए इनफ्लो से फंड वापस नहीं आया तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आईएमएफ प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान की स्थिति मुश्किल हो सकती है. दूसरी ओर, वित्तीय मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वह स्थिर फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान के बाहरी फ्लो पर लगातार नजर रख रही है और उन्हें मैनेज कर रही है. इसमें आगे कहा गया, पाकिस्तान सरकार अपनी सभी बाहरी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.
Q1. UAE ने कर्ज वापस क्यों मांगा?
अपने फाइनेंशियल रिस्क को कम करने और अनिश्चितता खत्म करने के लिए.
Q2. यूएई ने यह कर्ज कब और क्यों दिया था?
यह फंड 2019 में पाकिस्तान के 'पेमेंट बैलेंस' को स्थिर करने और अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए दिया गया था.
Q3. क्या पाकिस्तान डिफॉल्ट कर सकता है?
अभी नहीं, लेकिन जोखिम बना हुआ है.
Q5. पाकिस्तान के लिए आगे की चुनौती क्या है?
पाकिस्तान को चीन, सऊदी और यूएई से कुल 12.5 अरब डॉलर के 'रोलओवर' की जरूरत थी ताकि वह आईएमएफ की शर्तों को पूरा कर सके.
Q4. IMF की भूमिका क्या है?
आर्थिक स्थिरता के लिए फंडिंग और सुधार लागू करवाना.
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