डोनाल्ड ट्रंप का एक पोस्ट और दुनिया में भूचाल! चीन से दोस्ती, TikTok डील मंजूर, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने पर बनी बात!

यह अमेरिका और चीन के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत का ऐलान है. एक ऐसा अध्याय जो टकराव की जगह सहयोग, और दुश्मनी की जगह 'डील' पर आधारित हो सकता है. बेशक, आगे की राह आसान नहीं होगी, लेकिन इस एक फोन कॉल ने पूरी दुनिया को यह उम्मीद जरूर दे दी है.
डोनाल्ड ट्रंप का एक पोस्ट और दुनिया में भूचाल! चीन से दोस्ती, TikTok डील मंजूर, रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने पर बनी बात!

एक कहानी उस पोस्ट की, जिसने दुश्मनी की बर्फ पिघला दी. शुक्रवार की रात, जब दुनिया सोने की तैयारी कर रही थी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट किया निकला और पूरी दुनिया की जियो-पॉलिटिक्स में सुनामी आ गई. यह सिर्फ एक पोस्ट नहीं था, बल्कि दो महाशक्तियों- अमेरिका और चीन के बीच महीनों से जमी दुश्मनी की बर्फ के पिघलने का पहला और सबसे बड़ा संकेत था.

चीन को हमेशा खरी-खरी सुनाने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में जिस गर्मजोशी का जिक्र किया, उसने दुनिया भर के एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है. इस एक पोस्ट में व्यापार, युद्ध, टेक्नोलॉजी और कूटनीति का ऐसा कॉकटेल है, जो आने वाले कई महीनों तक दुनिया की दिशा तय करेगा.

TikTok पर लगा 'अप्रूवल' का ठप्पा

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इस फोन कॉल की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर है- TikTok डील को मंजूरी.

याद कीजिए वो दौर, जब ट्रंप ने ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अमेरिका में TikTok को बैन करने की धमकी दी थी. ByteDance (TikTok की पेरेंट कंपनी) पर अपनी अमेरिकी संपत्ति बेचने का भारी दबाव था. Oracle और Walmart के साथ एक जटिल डील की बात चली, लेकिन वो भी ठंडे बस्ते में चली गई. TikTok अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी की जंग का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था. और अब, अचानक ट्रंप का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में "TikTok डील के अप्रूवल" की सराहना की.

इसके क्या मायने हैं?

इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी को लेकर चल रहा टकराव अब खत्म होने की कगार पर है. यह ByteDance के लिए एक बहुत बड़ी जीत है और उन करोड़ों अमेरिकी यूजर्स के लिए राहत की सांस है जो इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. यह फैसला दिखाता है कि ट्रंप अब टकराव की बजाय 'डील-मेकिंग' के रास्ते पर लौट आए हैं.

शांति का मसीहा बनने की तैयारी? रूस-यूक्रेन युद्ध पर बड़ा दावा

ट्रंप ने अपने ट्वीट में दूसरी बड़ी बात कही कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की जरूरत पर भी "प्रगति" हुई है. यह एक बहुत बड़ा दावा है. यह युद्ध सालों से चल रहा है और दुनिया के बड़े-बड़े नेता इसे खत्म कराने में नाकाम रहे हैं. ऐसे में ट्रंप का यह कहना कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ मिलकर इस पर प्रगति की है, उन्हें एक वैश्विक 'पीसमेकर' (शांतिदूत) के रूप में पेश करता है.

चीन क्यों है अहम?

चीन, रूस का सबसे बड़ा रणनीतिक सहयोगी है. अगर चीन इस युद्ध को खत्म कराने के लिए रूस पर दबाव डालता है, तो इसके नतीजे निकल सकते हैं. ट्रंप का यह दावा उन्हें दुनिया के मंच पर एक ऐसे लीडर के रूप में स्थापित करता है जो सबसे मुश्किल समस्याओं को भी सुलझा सकता है.

दुश्मनी खत्म, दोस्ती शुरू?

यह फोन कॉल सिर्फ एक बातचीत नहीं थी, बल्कि आने वाले समय में होने वाली कई बड़ी मुलाकातों की नींव थी.

  • APEC समिट में मुलाकात: ट्रंप और शी जिनपिंग, दोनों साउथ कोरिया में होने वाली APEC (एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन) समिट में मिलेंगे. यह उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक मुलाकात होगी.
  • ट्रंप जाएंगे चीन: ट्रंप ने कहा कि वह अगले साल की शुरुआत में चीन का दौरा करेंगे.
  • शी आएंगे अमेरिका: इसके जवाब में राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी "एक उपयुक्त समय" पर अमेरिका का दौरा करेंगे.

यह मुलाकातों का पूरा कैलेंडर है, यह साफ संकेत है कि दोनों देश अब एक-दूसरे से सीधी बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाना चाहते हैं, न कि मीडिया या ट्रेड वॉर के जरिए.

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ट्रेड वॉर से फेंटानिल तक: पुराने मुद्दों पर भी बनी बात

ट्रंप ने जिक्र किया कि व्यापार (Trade) और फेंटानिल (Fentanyl) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी प्रगति हुई है.

  • व्यापार: ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच एक विनाशकारी ट्रेड वॉर छिड़ गया था. अब 'प्रगति' का मतलब है कि दोनों देश शायद टैरिफ कम करने और व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
  • फेंटानिल: यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा घरेलू संकट है. यह एक खतरनाक ड्रग है जिसके केमिकल चीन से आते हैं. इस पर चीन का सहयोग अमेरिका के लिए एक बड़ी जीत होगी.

अब सवाल उठता है- ये अचानक दोस्ती क्यों?

ट्रंप का यह बदला हुआ रुख कई सवाल खड़े करता है.

  • क्या यह एक नई रणनीति है? हो सकता है कि ट्रंप यह समझ गए हों कि चीन से लगातार टकराव अमेरिका के हित में नहीं है. एक बिजनेसमैन के तौर पर, वह शायद अब एक ऐसी 'डील' करना चाहते हैं जिसमें दोनों देशों का फायदा हो.
  • क्या चीन दबाव में है? चीन की अर्थव्यवस्था भी कुछ चुनौतियों का सामना कर रही है. अमेरिका के साथ स्थिर संबंध चीन के लिए भी उतने ही जरूरी हैं. शी जिनपिंग भी शायद दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि चीन एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति है.

क्या यह सिर्फ दिखावा है?

कुछ आलोचक यह भी कह सकते हैं कि यह सिर्फ एक दिखावा हो सकता है और असली मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं.

एक नए युग की शुरुआत?

यह पोस्ट सिर्फ 280 कैरेक्टर का एक मैसेज नहीं है. यह अमेरिका और चीन के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत का ऐलान है. एक ऐसा अध्याय जो टकराव की जगह सहयोग, और दुश्मनी की जगह 'डील' पर आधारित हो सकता है. बेशक, आगे की राह आसान नहीं होगी, लेकिन इस एक फोन कॉल ने पूरी दुनिया को यह उम्मीद जरूर दे दी है कि जब दो बड़े नेता बात करने का फैसला करते हैं, तो सबसे मुश्किल समस्याएं भी सुलझाई जा सकती हैं. अब पूरी दुनिया की नजरें APEC समिट पर टिकी हैं, जहाँ इस 'नई दोस्ती' की पहली बड़ी परीक्षा होगी.

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