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ट्रंप ने ईरान को फिर दी खुली चेतावनी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच ट्रंप ने जो ताजा बयान दिया है, उसने युद्ध की आहट को और तेज कर दिया है.
ट्रंप ने बिना किसी लाग-लपेट के साफ कर दिया है कि उनके सब्र का बांध अब टूट चुका है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा है कि ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं- या तो वह अमेरिका द्वारा पेश की गई शांति संधि (Deal) को स्वीकार करे, या फिर अपने देश के बुनियादी ढांचे की पूरी तरह बर्बादी देखने के लिए तैयार रहे.
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब ईरान पर 'सीजफायर' के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा है कि अब "मिस्टर नाइस गाय" (Mr. Nice Guy) का समय खत्म हो चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यह समझौता होकर रहेगा, चाहे वह सीधी बातचीत से हो या फिर अमेरिकी ताकत के इस्तेमाल से.
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ट्रंप के इस गुस्से की सबसे बड़ी वजह कल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में हुई घटना है. ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सीजफायर समझौते का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए वहां गोलियां चलाईं. बड़ी बात यह है कि ये गोलियां केवल हवा में नहीं थीं, बल्कि इनमें से कई का निशाना एक फ्रांसीसी जहाज और यूनाइटेड किंगडम का एक मालवाहक जहाज (Freighter) था.

ट्रंप ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा कि यह व्यवहार बिल्कुल भी अच्छा नहीं था. उन्होंने ईरान की उस घोषणा का भी मजाक उड़ाया जिसमें उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की बात कही थी. ट्रंप ने कहा कि यह अजीब है कि ईरान इसे बंद करने की बात कर रहा है, जबकि अमेरिका की नाकाबंदी (Blockade) ने इसे पहले ही बंद कर दिया है. ट्रंप का मानना है कि इस रास्ते के बंद होने से अमेरिका का कुछ नहीं बिगड़ रहा, बल्कि ईरान को खुद हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है.
इस पूरे तनाव के बीच कूटनीति का एक सिरा पाकिस्तान के इस्लामाबाद से भी जुड़ रहा है. ट्रंप ने एलान किया है कि उनके प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद जा रहे हैं और वे कल शाम तक वहां पहुंच जाएंगे. यह कदम दिखाता है कि अमेरिका अभी भी बातचीत का एक आखिरी मौका देना चाहता है, लेकिन इस बार टेबल पर रखी गई शर्तें काफी सख्त होंगी.
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ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक बहुत ही निष्पक्ष और उचित डील ऑफर कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि ईरान के नेता समझदारी दिखाएंगे और इस डील को स्वीकार करेंगे. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई बिजली की गति से होगी और वह ईरान को संभलने का मौका भी नहीं देगी.
डोनाल्ड ट्रंप ने जो सबसे भयानक धमकी दी है, वह ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर ईरान ने डील नहीं ली, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के भीतर मौजूद हर एक पावर प्लांट और हर एक ब्रिज (पुल) को नष्ट कर देगा. ट्रंप का कहना है कि वे बिजली की तरह आएंगे और आसानी से अपना काम करके निकल जाएंगे.
ट्रंप ने पिछले राष्ट्रपतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो काम ईरान के साथ पिछले 47 सालों में हो जाना चाहिए था, वह अब उनके हाथों पूरा होगा. उन्होंने इसे अपना 'सम्मान' बताया कि वे उस काम को अंजाम देंगे जो दशकों से अधूरा पड़ा है. ट्रंप का सीधा संदेश है कि ईरान की "किलिंग मशीन" का अंत अब नजदीक है.
ईरान के रवैये पर हमला करते हुए ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका तेल के मामले में अब किसी का मोहताज नहीं है. उन्होंने कहा कि जिस समय ईरान 'टफ गाय' बनने की कोशिश कर रहा है और रास्ते बंद कर रहा है, ठीक उसी वक्त दुनिया के कई जहाज अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर बढ़ रहे हैं ताकि वहां से तेल लोड किया जा सके.
ट्रंप के मुताबिक, ईरान अपनी हरकतों से अनजाने में अमेरिका की ही मदद कर रहा है. अमेरिका के पास ऊर्जा के पर्याप्त संसाधन हैं और वह किसी भी लंबी लड़ाई के लिए आर्थिक और सामरिक रूप से तैयार है.