ट्रंप का 'टैरिफ वॉर'! पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ का ऐलान, मेटल एक्सपोर्ट के नियम भी बदले

Trump Tariffs: यह सिर्फ टैरिफ नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन को री-शेप करने की रणनीति है. इसका असर आने वाले समय में दवा, मेटल और पूरी ट्रेड इकॉनमी पर दिखेगा.
ट्रंप का 'टैरिफ वॉर'! पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ का ऐलान, मेटल एक्सपोर्ट के नियम भी बदले

पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ, मेटल्स नियम भी बदले.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Reuters)

Trump Tariffs: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने अब भारत सहित उन सभी देशों से आने वाली पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जिन्होंने अमेरिका के साथ 'रिशोरिंग' या 'MFN प्राइसिंग' समझौता नहीं किया है. इसके साथ ही स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर जैसे धातुओं के निर्यात पर भी नए नियम लागू कर दिए गए हैं.

ज़ी बिजनेस के रिपोर्टर अंबरीश पांडेय के मुताबिक, अमेरिका अपनी दवा और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन को देश के अंदर लाना चाहता है, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो.

क्या है नया टैरिफ नियम?

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  • अमेरिका ने बड़ा फैसला लेते हुए पेटेंटेड दवाओं के इंपोर्ट पर 100% टैरिफ लगा दिया.
  • यह उन कंपनियों पर लागू होगा जो US में प्रोडक्शन शिफ्ट नहीं कर रहीं और MFN प्राइसिंग डील में शामिल नहीं हैं.

क्या जेनेरिक दवाओं पर भी टैक्स बढ़ेगा?

फिलहाल जेनेरिक दवाओं को इस टैरिफ से बाहर रखा गया है. हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जेनेरिक कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका शिफ्ट नहीं करतीं, तो भविष्य में इन पर भी विचार किया जा सकता है.

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किन देशों पर सबसे ज्यादा असर?

भारत जैसे देश प्रभावित होंगे क्योंकि-

  • US को बड़े पैमाने पर दवा निर्यात
  • कई कंपनियां अभी US में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं

कब से लागू होगा ये नियम?

  • बड़ी कंपनियों के लिए 31 जुलाई 2026 से और छोटी कंपनियों के लिए 29 सितंबर 2026 से लागू होंगे.
  • बड़ी कंपनियों जैसे Pfizer, Eli Lilly, Novo Nordisk, Johnson & Johnson समेत 17 के लिए 31 जुलाई 2026 से (120 दिन बाद)
  • - अन्य कंपनियों के लिए: 29 सितंबर 2026 से (180 दिन बाद)
  • विशेष छूट- Orphan drugs, cancer treatments, gene/cell therapy, animal health products आदि पर कई मामलों में छूट दी गई है.

किन देशों को राहत मिली?

  • कुछ देशों को कम टैरिफ यूरोपियन यूनियन, जापान, साउथ कोरिया, स्विट्जरलैंड- 15%
  • यूनाइटेड किंगडम- 10% को राहत मिली है. इसका कारण इन देशों ने पहले ही US के साथ एग्रीमेंट कर लिया है.

मेटल सेक्टर में क्या बदला?

स्टील और एल्युमीनियम के लिए नए नियम क्या हैं?

  • 15% से कम वजन- अगर किसी उत्पाद में मेटल का वजन 15% से कम है, तो कोई अलग मेटल टैरिफ नहीं लगेगा.
  • 15% से अधिक वजन- अगर मेटल का वजन 15% से ज्यादा है, तो पूरे उत्पाद की वैल्यू पर फ्लैट 25% टैरिफ लगेगा.

आपके लिए इसका क्या मतलब है?

भारतीय फार्मा कंपनियोंके लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है. हालांकि जेनेरिक दवाओं के बचने से तुरंत बड़ा झटका नहीं लगा है, लेकिन पेटेंटेड पोर्टफोलियो वाली कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी. निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनका एक्सपोर्ट अमेरिका केंद्रित है, क्योंकि टैरिफ लागू होने से उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. क्या भारत की सभी दवा कंपनियां प्रभावित होंगी?
नहीं, सिर्फ पेटेंटेड दवा एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी.

Q2. क्या जनरिक दवाओं पर भी टैरिफ लगेगा?
अभी नहीं, लेकिन भविष्य में संभव.

Q3. इस फैसले का मकसद क्या है?
अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना.

Q4. क्या मेटल सेक्टर पर असर पड़ेगा?
हां, खासकर एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर.

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