&format=webp&quality=medium)
USTR Initiates Section 301 Investigations.
जियो पॉलिटिकल क्राइसिस के बीच ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 301 के तहत अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस को लेकर जांच का आदेश दिया है. USTR यानी यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने भारत समेत 16 देशों पर सेक्शन 301 के तहत जांच की शुरुआत की है. यह जांच भारत के अलावा चीन, यूरोपियन यूनियन, सिंगापुर, स्विटजरलैंड, नार्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको और जापान के खिलाफ शुरू की गई है.
सेक्शन 301 के तहत USTR अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस की जांच करता है. इसका मकसद किसी भी देश की तरफ से उस बिजनेस प्रैक्टिस की जांच करना है जिससे अमेरिकी कॉमर्स को नुकसान पहुंचने की संभावना है. अगर अमेरिकी प्रशासन को लगेगा कि एक्सेस मैन्युफैक्चरिंग के कारण अमेरिका को नुकसान पहुंच सकता है तो नए सिरे से टैरिफ का ऐलान किया जा सकता है.
Section 301: विस्तार से समझें
जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका अब व्यक्तिगत रूप से देशों की जांच करेगा:
देश-दर-देश जांच: अमेरिका यह पता लगाएगा कि चीन, वियतनाम, दक्षिण-पूर्व एशिया और यहां तक कि यूरोपीय देश किस तरह की गलत नीतियां अपना रहे हैं.
बाधाओं की पहचान: इसमें अनुचित व्यापार बाधाओं, टैरिफ और 'फेक' रेगुलेटरी बाधाओं को पहचाना जाएगा जो अमेरिकी माल को उनके बाजार में घुसने से रोकते हैं.
बातचीत का मौका: पहले अमेरिका उन देशों के साथ टेबल पर बैठकर बात करेगा और इन प्रैक्टिस को खत्म करने के लिए कहेगा.
मकसद: टैरिफ का अंतिम लक्ष्य उन गलत प्रथाओं को पूरी तरह से समाप्त करवाना है.
दरअसल ट्रंप सरकार ने जब ट्रेड वार (Trade War) शुरू किया था तब उन्होंने IEEPA कानून का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि व्यापार घाटे की वजह से देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति बन गई है. इसी के आधार पर उन्होंने दुनियाभर के देशों पर टैरिफ का ऐलान किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को अमान्य करार दिया था.