मतलब अमेरिका अगला बम यहां गिरा सकता है, ट्रंप की धमकी से मिल गया इशारा, यही है ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है- या तो 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को खोलें, वरना ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्रों को मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा. इस धमकी के केंद्र में है दमावंद कंबाइंड साइकिल पावर प्लांट (Damavand Combined Cycle Power Plant), जो ईरान की राजधानी तेहरान की लाइफलाइन है.
मतलब अमेरिका अगला बम यहां गिरा सकता है, ट्रंप की धमकी से मिल गया इशारा, यही है ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट!

पश्चिम एशिया के हालात इस वक्त 'बारूद के ढेर' पर बैठे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपनी आक्रामक विदेश नीति के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने ईरान को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी है. मामला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर फंसा है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है.

ईरान की तरफ से इस रास्ते को बंद करने की कोशिशों के जवाब में ट्रंप ने सीधे ईरान के 'पावर ग्रिड' को उड़ाने की धमकी दी है. इस कहानी का सबसे डरावना हिस्सा यह है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो ईरान का गौरव कहा जाने वाला दमावंद पावर प्लांट पहला निशाना हो सकता है. आइए, इस पूरे विवाद और दमावंद प्लांट की अहमियत को विस्तार से समझते हैं.

पहले जानिए क्या दी है ट्रंप ने धमकी

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डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल मीडिया पर लिखा है- 'अगर ईरान ने 48 घंटे के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी खतरे के पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके अलग-अलग पावर प्लांट्स पर हमला करके उन्हें पूरी तरह तबाह कर देगा. और यह हमला सबसे पहले सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगा.'

दमावंद पावर प्लांट: क्यों है यह ईरान के लिए इतना खास?

दमावंद संयुक्त चक्र विद्युत संयंत्र (Damavand Combined Cycle Power Plant) सिर्फ एक बिजली घर नहीं है, बल्कि यह ईरान की औद्योगिक मजबूती का प्रतीक है.

लोकेशन: यह तेहरान के पास स्थित है और इसका नाम ईरान के सबसे ऊंचे पर्वत 'माउंट दमावंद' के नाम पर रखा गया है.

लागत: इसे बनाने में लगभग 2 बिलियन यूरो (करीब 2.6 बिलियन डॉलर) खर्च हुए थे. भारतीय रुपयों में यह राशि ₹22,000 करोड़ से भी ज्यादा बैठती है.

क्षमता: इसकी उत्पादन क्षमता 3000 मेगावाट (MW) के आस-पास है, जो इसे ईरान का सबसे बड़ा पावर प्लांट बनाती है. तेहरान की बत्तियां इसी प्लांट के दम पर जलती हैं.

'कंबाइंड साइकिल' तकनीक: यह कैसे काम करता है?

यह प्लांट अपनी अत्याधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. इसमें दो चरणों में बिजली पैदा होती है:

गैस टर्बाइन: पहले प्राकृतिक गैस को जलाकर टर्बाइन घुमाई जाती है और बिजली बनती है.

स्टीम टर्बाइन: गैस टर्बाइन से जो गर्म हवा (वेस्ट हीट) निकलती है, उससे पानी उबालकर भाप (Steam) बनाई जाती है. इस भाप से दूसरी टर्बाइन चलती है.

फायदा: इस तकनीक से कम ईंधन में ज्यादा बिजली पैदा होती है और प्रदूषण भी कम होता है.

ट्रंप की 48 घंटे की 'डेडलाइन' और अल्टीमेटम

शनिवार को ट्रंप का रुख अचानक बदल गया. जहां पहले वह मिलिट्री ऑपरेशन कम करने की बात कर रहे थे, अब वह सीधे 'काउंटडाउन' पर आ गए हैं.

अल्टीमेटम: "होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना 48 घंटे बाद तुम्हारे बिजली घर नहीं बचेंगे."

ट्रंप का दावा: ट्रंप ने पहले भी कहा था कि अमेरिका ईरान की इलेक्ट्रिक क्षमता को 1 घंटे के भीतर खत्म कर सकता है, जिसे दोबारा खड़ा करने में ईरान को 25 साल लग जाएंगे.

ईरान के टॉप पावर प्लांट (अमेरिका के संभावित निशाने)

दमावंद (Damavand)तेहरान के पास2,868राजधानी की मुख्य आपूर्ति
केरमान (Kerman)दक्षिण-पूर्वी ईरान1,910औद्योगिक क्षेत्र की लाइफलाइन
रामिन (Ramin)खुज़ेस्तान प्रांत1,890तेल समृद्ध क्षेत्र का मुख्य प्लांट
बुशहर (Bushehr)दक्षिणी तट1,000ईरान का इकलौता परमाणु बिजली घर

क्या होगा अगर दमावंद पर बम गिरे?

अगर अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:

अंधेरे में डूबेगा ईरान: तेहरान समेत ईरान के बड़े हिस्से में हफ़्तों तक ब्लैकआउट हो सकता है.

अस्पताल और पानी ठप: बिजली जाने का मतलब है अस्पतालों में लाइफ सपोर्ट सिस्टम बंद होना और शहरों में पानी की सप्लाई रुक जाना.

ग्लोबल इकोनॉमी पर असर: युद्ध छिड़ने से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई का विस्फोट होगा.

ईरान में कई बड़े पावर प्लांट हैं

तेहरान के पास स्थित दामावंद पावर प्लांट के अलावा भी ईरान में कई बड़े पावर प्लांट हैं. दक्षिण-पूर्व ईरान में कर्मन पावर प्लांट भी काफी अहम है, जो करीब 1900 मेगावॉट बिजली पैदा करता है. वहीं खुज़ेस्तान प्रांत में रामिन स्टीम पावर प्लांट भी करीब 1900 मेगावॉट बिजली बनाता है. इसके अलावा, ईरान का एकमात्र परमाणु पावर प्लांट बुशेहर में है, जो करीब 1000 मेगावॉट बिजली बनाता है.

घरेलू राजनीति और ट्रंप का दबाव

ट्रंप के सामने नवंबर में चुनाव हैं. अमेरिका में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और महंगाई उनके लिए बड़ी चुनौती है. वह जनता को यह दिखाना चाहते हैं कि वह ईरान जैसे देशों के सामने झुकने वाले नहीं हैं. हालांकि, नाटो (NATO) के सहयोगी देश ट्रंप के इस 'अकेले युद्ध' में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं.

Conclusion

अगले 48 घंटे पूरी दुनिया के लिए बहुत भारी हैं. अगर कूटनीति फेल हुई और दमावंद पावर प्लांट पर हमला हुआ, तो यह सिर्फ ईरान की तबाही नहीं होगी, बल्कि पूरी दुनिया एक भीषण ऊर्जा संकट और युद्ध की आग में झुलस जाएगी. दमावंद जैसे अत्याधुनिक प्लांट को बनाना सालों की मेहनत का काम है, लेकिन इसे मिटाने के लिए सिर्फ एक मिसाइल काफी है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों महत्वपूर्ण है?

यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. यहां से गुजरने वाले जहाजों के रुकने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो सकती है.

2- क्या अमेरिका परमाणु बिजली घर (Bushehr) पर भी हमला कर सकता है?

परमाणु प्लांट पर हमला करने से रेडियोधर्मी रिसाव (Radiation leak) का खतरा होता है, जो पूरी दुनिया के लिए घातक होगा. इसलिए अमेरिका पारंपरिक पावर प्लांट्स (गैस/स्टीम) को निशाना बनाने की बात कर रहा है.

3- दमावंद प्लांट को बनने में कितना समय लगा था?

इसे बनाने में कई साल और अरबों डॉलर का निवेश लगा था. ट्रंप के अनुसार, इसे दोबारा बनाने में 25 साल लग सकते हैं.

4- क्या इस तनाव से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?

हां, अगर खाड़ी क्षेत्र में युद्ध शुरू होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होगी और भारत में तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं.

5- ट्रंप ने 48 घंटे का ही समय क्यों दिया?

यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव (Psychological pressure) बनाने की रणनीति है ताकि ईरान बिना युद्ध के ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे.

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