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मिडिल ईस्ट युद्ध पर अमेरिका की ओर से शांति वार्ता को लेकर इशारे दिए जा चुके हैं. ईरान की ओर से अभी तक इसपर कोई साफ रुख सामने नहीं आया है, लेकिन हॉर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए जो 48 घंटों का डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम था, उसके पहले ही ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न काफी कुछ कहता है.
फिलहाल, ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के कुछ सूत्रों की मानें तो अमेरिका का फोकस ईरान में अपने मन-मुताबिक शख्स को सत्ता पर बिठाने का कोशिशों पर है. Politico ने एक रिपोर्ट में दो ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से कहा है कि ट्रंप सरकार ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़लिबाफ को अपने संभावित पार्टनर (और हो सके तो भविष्य में ईरान के नए नेता) के तौर पर आंक रही है.
मोहम्मद बागेर ग़लिबाफ यूएस और उनके सहयोगियों का प्रतिरोध करते रहे हैं, लेकिन वाइट हाउस में कुछ लोगों का मानना है कि वो नेगोसिएशन में काम के आदमी साबित हो सकते हैं और आगे ईरान का नेतृत्व भी कर सकते हैं. हालांकि, रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वाइट हाउस अपना दांव बस किसी एक नाम पर नहीं लगाना चाहता, बल्कि कई ऐसे नामों को आंकना चाहता है, जो असल में आगे डील करवाने में सफल हो सकें. लेकिन इस लिस्ट में ग़लिबाफ का नाम ऊपर है. ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि अभी इस पर विचार किया जा रहा है, जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.
दरअसल, ईरान के साथ ये संघर्ष अमेरिका के लिए मुश्किल का सबब बन गया है. ईरान की ओर से जारी प्रतिरोध के बीच दुनिया भर के बाजार प्रभावित हो रहे हैं, तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और महंगाई बढ़ने की चिंताएं दुनिया भर को जकड़ रही हैं, ऐसे में अमेरिका इस दलदल से बाहर आने के रास्ते ढूंढ रहा है, जिसका हिस्सा एक नेगोशिएटिंग पार्टनर को ढूंढना भी है. साथ ही इजरायल-अमेरिका ने अयातुल्लाह खमैनी को रास्ते से हटाने के अपने मकसद में कामयाब हो गए हैं, तो अब ये भी सवाल है कि ईरान में अब आगे क्या होगा?
एक दिलचस्प एंगल ये भी है कि अभी जो स्थिति है, उसमें ट्रंप को अपना सबसे ज्यादा फायदा कहां दिखता है. ट्रंप को क्या चाहिए? कच्चा तेल. और प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि ट्रंप ऑयल डील चाहते हैं. एक सूत्र ने कहा कि ट्रंप ईरान के तेल भंडार खर्ग आइलैंड पर कब्जा नहीं चाहते हैं, वो वेनेजुएला जैसी कहानी ईरान में दोहराना चाहते हैं, जहां उनको अपनी पसंद के मुताबिक ऑयल डील मिल सके. वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को हटने के बाद उनके उपराष्ट्रपति Delcy Rodríguez ने सत्ता संभाला और ट्रंप के साथ ऑयल डील की.
हालांकि, रिपोर्ट की मानें तो खुद ट्रंप के नेशनल सिक्योरिटी टीम के करीबी एक सूत्र को ये संभावना सच होती नहीं दिखती. सूत्र ने कहा कि अगर ऐसी बातचीत हो रही है तो अच्छी बात है कि इससे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढा जा रहा है, लेकिन ईरान ने हमारे लिए मुश्किलें खड़ी की हैं और ऐसा नहीं लगता कि वो ट्रंप से आगे कोई ऑयल डील करेंगे.
यही वजह है कि ट्रंप को वहां एक नेगोशिएटिंग पार्टनर चाहिए, ताकि ईरान के साथ ये संघर्ष खत्म हो सके और उन्हें एक ऑयल डील मिल सके, जैसा कि वो पहले वेनेजुएला में कर चुके हैं.
लेकिन ये रास्ता मुश्किल रहने वाला है, क्योंकि ग़लिबाफ शायद ही ट्रंप की शर्तों के मुताबिक झुकें. ऐसा कुछ लोगों का मानना है कि वो महत्वकांक्षी और व्यावहारिक हैं, लेकिन मूल तौर पर वो ईरान के इस्लामिस्ट सत्ता के ही समर्थक हैं. ऐसे में वो ट्रंप के साथ शायद ही कोई डील करें. वो भी तब जब ईरान में अमेरिका और इजरायल को लेकर गहरा अविश्वास और रोष है.