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भारतीय संगीत और संस्कृति का एक चमकता हुआ अध्याय आज समाप्त हो गया. अपनी जादुई और खनकती आवाज से 8 दशकों तक दुनिया भर के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाली महान गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली. रविवार का दिन न केवल बॉलीवुड के लिए, बल्कि दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए शोक की लहर लेकर आया.
आशा भोसले केवल एक गायिका नहीं थीं. वह एक ऐसी शख्सियत थीं, जिन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक ब्रिज का काम किया. जहां एक तरफ उनकी आवाज ने लोगों को दीवाना बना दिया, वहीं दूसरी तरफ उनके हाथों के स्वाद ने सात समंदर पार भारतीय खाने का परचम लहराया.
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आशा जी के जीवन का दूसरा सबसे बड़ा पहलू उनका खाना पकाने के प्रति प्रेम था. संगीत के बाद भोजन ही उनकी दूसरी सबसे बड़ी पसंद थी.
आशा जी अक्सर अपने बचपन को याद करते हुए बताती थीं कि उनके पिता की 'थिएटर कंपनी' जब एक शहर से दूसरे शहर जाती थी, तो सभी कलाकार एक साथ बैठकर भोजन करते थे. रसोई में बड़े-बड़े बर्तनों में बनते खाने की खुशबू और लोगों के चेहरों पर तृप्ति के भाव देखकर ही उनके मन में कुकिंग के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. उन्होंने एक बार कहा था, "जब मैं शेफ कोट पहनती हूं, तो मुझे लगता है जैसे मैंने कोई बहुत सुंदर ड्रेस पहनी हो."
साल 2002 में दुबई के वाफी सिटी मॉल (WAFI City Mall) में पहले 'Asha's' रेस्टोरेंट की नींव रखी गई. यह किसी सेलिब्रिटी के नाम पर आधारित सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं था, बल्कि एक गंभीर बिजनेस वेंचर था. पिछले 22 सालों में यह ब्रांड एक वैश्विक पहचान बन चुका है.
आशा भोसले की रेस्टोरेंट चेन आज दुनिया के कई प्रमुख देशों में सफलतापूर्वक चल रही है, जिनमें से कुछ ये रहे:
संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दुबई और अबू धाबी में इसकी कई शाखाएं हैं.
खाड़ी क्षेत्र: कुवैत, बहरीन और कतर में 'Asha's' ने अपनी जगह बनाई है.
यूनाइटेड किंगडम (UK): बर्मिंघम और मैनचेस्टर जैसे शहरों में इस रेस्टोरेंट को बहुत पसंद किया जाता है.
लंदन: ब्रिटिश राजधानी में भी इस स्वाद का जादू चलता है.

Asha's रेस्टोरेंट की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी प्रमाणिकता (Authenticity) है. आशा जी केवल नाम के लिए इस रेस्टोरेंट से नहीं जुड़ी थीं.
खुद निगरानी: वह मुंबई में बैठकर अपने परिवार की पुरानी रेसिपी के आधार पर 'गरम मसाला' तैयार करवाती थीं. यह मसाला चक्कियों पर उनके सामने पीसा जाता था और फिर सभी अंतरराष्ट्रीय शाखाओं में भेजा जाता था.
कुकिंग फिलॉसफी: उनका मानना था कि खाना दिल से बनाया जाना चाहिए. वे अक्सर कहती थीं कि वे बहुत तेजी से खाना बनाती हैं और चखकर ही बता सकती हैं कि उसमें कौन सा मसाला किस मात्रा में है.
सिग्नेचर डिशेज: उनके रेस्टोरेंट के मेन्यू में उत्तर-पश्चिम भारत के पकवानों की भरमार है.
Asha's रेस्टोरेंट में प्रवेश करना आशा भोसले के व्यक्तिगत जीवन और भारतीय इतिहास के एक हिस्से को देखने जैसा है.
ऐतिहासिक तस्वीरें: दीवारों पर दुर्लभ ब्लैक-एंड-व्हाइट फोटो लगे हैं. एक तस्वीर में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिखती हैं, जिसके बारे में वे कहती थीं, "मोदी जी पहले दिन पीएम बने और दूसरे दिन मैं उनसे मिली."
फिल्मी सितारे: वहां देव आनंद (जिन्हें वे अपना हीरो कहती थीं), इंदिरा गांधी, रवि शंकर, शाह रुख खान, अमिताभ बच्चन और सलमान खान के साथ उनकी यादें संजोई गई हैं.
पारिवारिक कोना: वहां उनके बेटे, पोते-पोतियों और उनके खुद के बचपन (6 महीने की उम्र) की फोटो भी है.

आशा भोसले को न केवल गायकी में बल्कि उनके रेस्टोरेंट बिजनेस के लिए भी वैश्विक सम्मान मिला.
द करी ऑस्कर (The Curry Oscars): ब्रिटिश करी अवार्ड्स के 13वें वार्षिक समारोह में आशा भोसले को 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया. यह उनके द्वारा भारतीय खानपान और आतिथ्य सत्कार (hospitality) में दिए गए योगदान का सम्मान था.
नागरिक सम्मान: भारत सरकार ने उन्हें दादा साहब फाल्के अवार्ड और पद्म विभूषण से सम्मानित किया था.
आशा जी ने 79 वर्ष की उम्र में 2013 में फिल्म माई (Mai) से अपना एक्टिंग डेब्यू किया था. उन्होंने हमेशा खुद को चुनौतियों के सामने खड़ा किया. चाहे वह अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर की तुलना से हटकर अपनी अलग पहचान बनाना हो, या संगीत से हटकर एक सफल बिजनेस साम्राज्य खड़ा करना हो.
वह अक्सर कहती थीं कि खाना खिलाने में जो खुशी मिलती है, वह संगीत जैसी ही रूहानी होती है. उनके रेस्टोरेंट में आने वाले मेहमानों को अक्सर ऐसा महसूस होता था जैसे वे आशा जी के लिविंग रूम में बैठे हों और वे खुद उन्हें कहानियां सुनाते हुए खाना खिला रही हों.
आशा भोसले का निधन भारतीय कला और उद्योग जगत के लिए एक युग का अंत है. उन्होंने हमें सिखाया कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती और अगर जुनून हो, तो आप 70 की उम्र के बाद भी एक नया साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं. उनकी आवाज हमारे कानों में गूंजती रहेगी और उनके द्वारा स्थापित स्वाद की विरासत दुनिया भर के रेस्टोरेंट्स में महकती रहेगी. वह एक ऐसी 'मदर इंडिया' थीं, जिन्होंने अपनी आवाज और अपने हाथों के जायके से दुनिया को जीत लिया.
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