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अमेरिका के बोस्टन में एक संघीय ग्रैंड ज्यूरी ने 10 भारतीय नागरिकों के खिलाफ वीजा धोखाधड़ी के गंभीर आरोप तय किए हैं. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने अमेरिका में कानूनी रूप से रहने के लिए 'U-Visa' हासिल करने के उद्देश्य से एक बड़ी साजिश रची थी. इस साजिश के तहत, इन्होंने सुविधा स्टोर (Convenience stores) और रेस्तरां में नकली डकैतियां करवाईं.
इस पूरे खेल का मकसद यह था कि स्टोर में मौजूद क्लर्क खुद को हिंसक अपराध का पीड़ित दिखा सकें और पुलिस की मदद करने का दावा करके विशेष आव्रजन लाभ (Immigration Benefits) हासिल कर सकें.
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U-वीजा उन लोगों को दिया जाता है जो किसी गंभीर अपराध के शिकार हुए हों, जिन्होंने मानसिक या शारीरिक शोषण सहा हो और जो उस अपराध की जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement) की मदद करते हैं.
आरोपियों ने इसी मानवीय कानून का फायदा उठाने की कोशिश की. उन्होंने रामभाई पटेल नाम के एक व्यक्ति को पैसे दिए, जिसने इन नकली डकैतियों की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी. रामभाई पटेल और उसके ड्राइवर बलविंदर सिंह को मई 2025 में ही दोषी ठहराया जा चुका है.
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जांच दस्तावेजों के अनुसार, मार्च 2023 के आसपास यह गिरोह सक्रिय था. इनकी कार्यप्रणाली कुछ इस तरह थी:
नकली डकैत: एक 'लुटेरा' नकली बंदूक के साथ स्टोर में घुसता था और वहां मौजूद कर्मचारियों को डराता-धमकाता था.
वीडियो रिकॉर्डिंग: यह सुनिश्चित किया जाता था कि पूरी घटना स्टोर के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में रिकॉर्ड हो जाए, ताकि इसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.
पुलिस को सूचना: डकैत के भागने के करीब 5-10 मिनट बाद पुलिस को फोन किया जाता था, ताकि वह आसानी से सुरक्षित दूरी पर पहुंच सके.
भुगतान: कथित "पीड़ितों" ने रामभाई पटेल को इस साजिश का हिस्सा बनने के लिए मोटी रकम दी थी और पटेल ने स्टोर मालिकों को उनके स्टोर का इस्तेमाल करने के लिए पैसे दिए थे.
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इन सभी आरोपियों को मार्च 2026 में शुरुआती आरोपों के बाद अब औपचारिक रूप से आरोपित (Indict) किया गया है. इनमें शामिल हैं:
संभावित सजा: वीजा धोखाधड़ी की साजिश के लिए अधिकतम 5 साल की जेल, 3 साल की निगरानी में रिहाई और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना हो सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सजा पूरी होने के बाद इन सभी को भारत डिपोर्ट (Deport) कर दिया जाएगा.
अमेरिकी अटॉर्नी लेह बी. फोली ने साफ किया कि आव्रजन प्रणाली के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो शॉर्टकट के जरिए अमेरिकी वीजा हासिल करने की कोशिश करते हैं. नकली अपराधों के जरिए 'पीड़ित' बनने का यह रास्ता अब जेल और डिपोर्टेशन की ओर ले जा रहा है.
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10 भारतीयों की तरफ से रची गई यह साजिश तकनीक और सतर्कता के कारण नाकाम हो गई. अमेरिका में रहने की चाहत में कानून को हाथ में लेना इन लोगों को बहुत महंगा पड़ा है. अब ये आरोपी न केवल अपनी आजादी खोने के कगार पर हैं, बल्कि उनका अमेरिका में रहने का सपना भी हमेशा के लिए खत्म हो गया है.
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